यमन में एक बड़ा कानूनी कदम उठाया गया है। वहां के अटॉर्नी जनरल ने भंग हो चुकी Southern Transitional Council (STC) के सभी बैंक खातों और पैसों को जब्त करने का आदेश दिया है। यह फैसला भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के चलते लिया गया है ताकि सरकारी संपत्ति को बचाया जा सके।

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अटॉर्नी जनरल जज Qaher Mustafa ने बुधवार, 17 जून 2026 को यह फैसला सुनाया। इस आदेश के मुताबिक अब STC के किसी भी फंड को निकाला नहीं जा सकेगा और न ही इसे किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर या इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह रोक सभी बैंकों, वित्तीय संस्थानों और एक्सचेंज कंपनियों पर लागू होगी।

यमन के सेंट्रल बैंक और अन्य स्थानीय बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे इस आदेश का तुरंत पालन करें। साथ ही उन्हें यह भी कहा गया है कि STC से जुड़े जितने भी खाते या बैलेंस मौजूद हैं, उनकी पूरी जानकारी पब्लिक प्रोसिक्यूशन को दी जाए।

पब्लिक प्रोसिक्यूशन ने बताया कि यह एक अस्थायी कानूनी कदम है। जांच में ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि इन पैसों का संबंध सरकारी फंड की चोरी, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से हो सकता है। जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक इन पैसों को सुरक्षित रखना जरूरी है।

यह कार्रवाई एक दिन पहले यूएन सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में हुई मीटिंग के बाद आई है। 16 जून को यमन सरकार ने यूएन से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की सूची को बढ़ाने की मांग की थी। यूएन में यमन के प्रतिनिधि Abdullah Al-Saadi ने साफ कहा कि सरकार उन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है जिन्होंने विद्रोह किया और मानवाधिकारों का उल्लंघन किया। इसमें STC के प्रमुख Aidarous Al-Zubaidi का नाम भी शामिल है, जिन पर देशद्रोह के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।