यमन में युद्ध और आर्थिक तंगी ने बच्चों का बचपन छीन लिया है। वहां हालात अब इस मोड़ पर पहुंच गए हैं कि बच्चों के लिए पढ़ाई से ज्यादा जरूरी पेट भरना हो गया है। लाखों बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं क्योंकि उनके परिवारों के लिए जीवित रहना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

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यमन में बच्चों की शिक्षा और भूख का क्या हाल है?

Al Jazeera English की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक भूखे बच्चे को देखना बच्चे के स्कूल छोड़ने से कहीं ज्यादा दुखद है। यमन में लगभग 45 लाख बच्चे स्कूल से बाहर हैं और यह संख्या 60 लाख तक पहुंच सकती है। करीब 1.7 लाख शिक्षकों को सालों से तनख्वाह नहीं मिली है, जिसकी वजह से कई शिक्षकों ने काम छोड़ दिया है। जब बच्चे स्कूल नहीं जाते, तो वे बाल श्रम और कम उम्र में शादी जैसी समस्याओं का शिकार हो जाते हैं।

मानवीय सहायता और फंड की क्या समस्या है?

संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार यमन में लगभग 220 लाख लोगों को मदद की जरूरत है। UNICEF ने 2026 के लिए 146.3 मिलियन डॉलर की अपील की है ताकि 52 लाख लोगों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाई जा सकें। हालांकि, फंड की भारी कमी है और 2025 की अपील का केवल 29 प्रतिशत हिस्सा ही मिला था। क्षेत्रीय तनाव की वजह से खाने-पीने की चीजों और ईंधन के दाम बढ़ गए हैं, जिससे मदद पहुंचाना और मुश्किल हो गया है।

विवरण आंकड़े
स्कूल से बाहर बच्चे 45 लाख
मदद की जरूरत वाले लोग 220 लाख
गंभीर भूख का सामना करने वाले 180 लाख
कुपोषित बच्चे (5 साल से कम) 25 लाख
गंभीर रूप से कमजोर बच्चे (2026) 5 लाख
बिना वेतन वाले शिक्षक 1.7 लाख
UNICEF की अपील राशि 146.3 मिलियन डॉलर
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.