यमन में हालात एक बार फिर बिगड़ गए हैं। 20 जुलाई 2026 को सऊदी गठबंधन ने हूतियों के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने यमन में घेराबंदी की बात कही थी। गठबंधन ने साफ किया कि 2026 की पहली छमाही में 300 से ज्यादा कमर्शियल जहाज हुदायदाह, अल-सलीफ़ और रास इस्सा बंदरगाहों पर पहुंचे हैं, जिनमें खाने-पीने का सामान, ईंधन और निर्माण सामग्री शामिल थी।
हूतियों का समुद्री नाकेबंदी का ऐलान
गठबंधन ने हूतियों पर साना इंटरनेशनल एयरपोर्ट बंद करने और यमन एयरलाइंस के विमानों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। इसके जवाब में हूती नेता महदी अल-मशात और उनके सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने सऊदी अरब के खिलाफ तत्काल प्रभाव से ‘समुद्री घेराबंदी’ की घोषणा कर दी है। हूतियों का कहना है कि यह कदम 13 जुलाई को साना एयरपोर्ट पर हुए हमले के जवाब में उठाया गया है।
टकराव की शुरुआत कैसे हुई
इस पूरे विवाद की शुरुआत 13 जुलाई 2026 को हुई, जब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने एक ईरानी विमान को उतरने से रोकने के लिए साना एयरपोर्ट के रनवे को निशाना बनाया था। इसके बाद यमन के सिविल एविएशन और मौसम विभाग ने देश के सभी एयरपोर्ट को अगले आदेश तक बंद करने का ऐलान कर दिया। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रंडबर्ग ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए सभी पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है, क्योंकि 2022 से चल रही शांति की स्थिति अब खतरे में नजर आ रही है।
