यमन में पानी की भारी कमी ने किसानों और आम लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। कई महीनों तक बारिश न होने की वजह से खेत सूख गए हैं और फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। हालत इतनी खराब है कि पानी के कुएं भी सूख चुके हैं, जिससे पूरे इलाके में खाने-पीने का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

ताजा हालात की बात करें तो अप्रैल 2026 में यमन के कुछ हिस्सों में बहुत तेज बारिश हुई थी। इससे जहां एक तरफ फसलों को फायदा मिला, वहीं दूसरी तरफ भीषण बाढ़ आ गई जिससे 83,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए और काफी बुनियादी ढांचा तबाह हो गया। लेकिन इसके बाद मई और जून 2026 में बारिश फिर से कम हो गई और तापमान 38 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे खेती और पशुपालन पर फिर से बुरा असर पड़ा है।

पानी और खेती का गिरता स्तर

संयुक्त राष्ट्र के प्रोग्राम (UNDP) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी कि यमन की खेती वाली जमीन तेजी से बंजर हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 97% कृषि भूमि के रेगिस्तान बनने का खतरा है। 2025 में सूखे और भीषण गर्मी की वजह से अनाज का उत्पादन गिरकर केवल 4 लाख टन रह गया था।

पानी की कमी का असर आम लोगों पर कुछ इस तरह पड़ा है:

  • करीब 18 मिलियन लोगों के पास सुरक्षित पीने के पानी की सुविधा नहीं है।
  • 17 मिलियन से ज्यादा लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी के लिए तरस रहे हैं।
  • करीब 23 मिलियन लोगों को मानवीय सहायता और खाने की मदद की जरूरत है।
  • 1990 के बाद से देश में पानी की उपलब्धता में 60% की गिरावट आई है।

सरकारी और अंतरराष्ट्रीय कोशिशें

यमन सरकार और Southern Transitional Council (STC) ने पानी की इस समस्या को सुलझाने के लिए बैठकें की हैं और कुछ व्यावहारिक समाधान तैयार किए हैं। साथ ही, FAO और यूरोपीय संघ (EU) जैसी संस्थाएं पानी के सही इस्तेमाल और बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए काम कर रही हैं। मारिब बांध (Marib dam) जैसे प्रोजेक्ट्स को फिर से ठीक करने की कोशिश की जा रही है ताकि किसानों को राहत मिल सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि जमीन के नीचे का पानी बहुत तेजी से खत्म हो रहा है। अगर इसे रोकने के लिए कदम नहीं उठाए गए, तो अगले 20 सालों में यह पूरी तरह खत्म हो सकता है। इसके अलावा, कत (qat) जैसी ज्यादा पानी सोखने वाली फसलों की खेती ने इस संकट को और बढ़ा दिया है।