यमन के युवाओं के लिए नौकरी पाना अब एक सपना जैसा हो गया है। सालों से चल रहे युद्ध और कम मौकों की वजह से डिग्री धारी ग्रेजुएट्स को अपनी फील्ड में काम नहीं मिल रहा है। अब कई युवा सिर्फ जिंदा रहने के लिए किसी भी तरह का काम करने को मजबूर हैं। Al Jazeera के रिपोर्टर Yousef Mawry ने सनाआ से इस गंभीर स्थिति की जानकारी दी है।

यमन में बेरोजगारी और युवाओं का संघर्ष क्या है?

Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में सालों के संघर्ष ने रोजगार के अवसरों को खत्म कर दिया है। 2025 में यहां बेरोजगारी दर 17.32% थी और 2026 में भी इसके 17.00% के आसपास रहने का अनुमान है। World Bank के आंकड़ों के अनुसार 2024 में यमन की कुल श्रम शक्ति 7,847,788 थी, लेकिन नौकरी न मिलने के कारण पढ़े-लिखे लोग अब छोटे-मोटे काम कर रहे हैं।

खाने-पीने और मानवीय संकट की क्या स्थिति है?

नौकरी के साथ-साथ यमन में भूख का संकट भी गहरा गया है। UN के विशेष दूत Hans Grundberg ने बताया कि करीब 18 मिलियन लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकते हैं। FEWS NET के मुताबिक फरवरी से सितंबर 2026 के बीच लगभग 15 से 15.99 मिलियन लोगों को खाद्य सहायता की जरूरत होगी। UN के समन्वयक Julien Harneis ने चेतावनी दी कि 2026 में हालात और भी खराब हो सकते हैं।

सरकार और अर्थव्यवस्था में क्या बदलाव आ रहे हैं?

यमन सरकार ने अपनी ‘Socio-Economic Update’ रिपोर्ट में कहा कि अर्थव्यवस्था को बदलने की जरूरत है। अब कृषि, निर्माण और सेवाओं जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है ताकि ज्यादा नौकरियां मिल सकें। रिपोर्ट के अनुसार, मजबूरी में बहुत से लोग खेती की तरफ लौटे हैं और अब देश की 70% से ज्यादा वर्कफोर्स खेती से जुड़ी है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

यमन में बेरोजगारी की क्या स्थिति है?

यमन में 2025 में बेरोजगारी दर 17.32% थी और 2026 में इसके 17% के आसपास रहने का अनुमान है। युद्ध के कारण ग्रेजुएट्स को अपनी पढ़ाई के हिसाब से काम नहीं मिल रहा है।

यमन में खाद्य संकट कितना गंभीर है?

UN के अनुसार करीब 18 मिलियन लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। FEWS NET का अनुमान है कि 15 से 16 मिलियन लोगों को खाद्य सहायता की जरूरत होगी।