यमन में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बहुत खराब हो गई है। यहाँ के डॉक्टर और मेडिकल प्रोफेशनल अपनी जान बचाने और बेहतर कमाई के लिए देश छोड़कर जा रहे हैं। युद्ध और गरीबी की वजह से अस्पतालों में अब इलाज मिलना मुश्किल हो गया है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लाखों लोग अब बुनियादी इलाज के लिए भी तरस रहे हैं।
डॉक्टरों के देश छोड़ने की बड़ी वजहें
पिछले 12 सालों से चल रहे युद्ध ने यमन के स्वास्थ्य क्षेत्र को पूरी तरह तबाह कर दिया है। मेडिकल प्रोफेशनल्स के देश छोड़ने के पीछे कई बड़े कारण सामने आए हैं:
- असुरक्षा: अस्पतालों पर हवाई हमले और गोलाबारी हुई है, जिससे डॉक्टरों के लिए काम करना खतरनाक हो गया है।
- कम वेतन: डॉक्टरों को समय पर तनख्वाह नहीं मिल रही है और जो मिल रही है उससे परिवार चलाना मुश्किल है।
- संसाधनों की कमी: अस्पतालों में दवाइयां नहीं हैं, मशीनें खराब हैं और बिजली की भारी किल्लत रहती है।
यमन की स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति
World Health Organization (WHO) और अन्य संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार यमन में डॉक्टरों की संख्या बेहद कम रह गई है। स्थिति की गंभीरता को नीचे दी गई टेबल से समझा जा सकता है:
| विवरण | आंकड़े/स्थिति |
|---|---|
| डॉक्टरों का अनुपात (प्रति 1,000 लोग) | 0.1 (ग्लोबल औसत 1.9 है) |
| बिना डॉक्टर वाले जिले | 18 प्रतिशत जिले पूरी तरह खाली हैं |
| Taiz क्षेत्र में स्टाफ की कमी | 41 प्रतिशत स्टाफ देश छोड़ चुका है या विस्थापित है |
| काम कर रहे अस्पताल (2024) | सिर्फ 55 प्रतिशत अस्पताल चालू हैं |
| मेडिकल सामान की उपलब्धता | जरूरत का 30 प्रतिशत से भी कम सामान मौजूद है |
बीमारियों का बढ़ता खतरा और फंड की कमी
इलाज की कमी की वजह से यमन में हैजा (Cholera) जैसी बीमारियां तेजी से फैली हैं। मार्च 2024 में हैजे का बड़ा प्रकोप देखा गया। इसके अलावा खसरा, पोलियो और डिप्थीरिया जैसी बीमारियां भी बढ़ रही हैं क्योंकि 28 प्रतिशत बच्चों को जरूरी टीके नहीं लगे हैं।
UNICEF और WHO जैसी संस्थाएं यहाँ मदद कर रही हैं, लेकिन पैसों की कमी एक बड़ी समस्या है। 2025 के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलने वाला फंड 47.5 प्रतिशत तक ही पहुँच पाया है। इस वजह से करीब 453 स्वास्थ्य केंद्र बंद होने की कगार पर हैं और 2,300 अन्य केंद्रों को भी सपोर्ट खोना पड़ सकता है। करीब 17.8 मिलियन लोगों को तुरंत स्वास्थ्य सहायता की जरूरत है, जिसकी संख्या 2025 तक बढ़कर 19.7 मिलियन होने का अनुमान है।
