यमन में चल रहे तनाव के बीच 25 जुलाई 2026 को बड़ा सैन्य बदलाव देखने को मिला। यमन की सरकारी सेना ने सऊदी अरब के समर्थन से मारिब और अल-जौफ प्रांतों में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए। यह कार्रवाई चार साल से चले आ रहे युद्ध विराम के टूटने के बाद की गई है, जिसमें हूतियों के मिसाइल लॉन्च पैड, ड्रोन साइट्स और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया गया।
सैन्य तैयारी और हमलों का असर
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, अल-जुबाह, मजजार, अल-सफरा और महलिया जैसे इलाकों में हुए इन हमलों में कई हूती लड़ाकों और मिसाइल विशेषज्ञों के मारे जाने की सूचना है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मारिब में उच्च स्तरीय बैठकें हुई हैं, जिसमें प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के सदस्य सुलतान अल-अरदाह, रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल ताहिर अल-ओगाइली और सऊदी गठबंधन के अधिकारी शामिल हुए। यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी ने हूतियों पर ईरान के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है।
सऊदी अरब पर जवाबी हमला और क्षेत्रीय तनाव
जवाब में हूती सैन्य प्रवक्ता याहया सारी ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के जीजान और यानबू स्थित तेल संयंत्रों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। सऊदी नागरिक सुरक्षा ने प्रभावित क्षेत्रों में चेतावनी जारी की है। ग्रीक सुरक्षा सूत्रों ने पुष्टि की कि यानबू में रिफाइनरियों की ओर बढ़ रही दो बैलिस्टिक मिसाइलों को वहां तैनात ग्रीक एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोक दिया। यह पूरा घटनाक्रम लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है, क्योंकि हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है, जबकि दूसरी ओर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को रोकने का दावा किया है।
