यमन में हूती हमलों से बढ़ा तनाव, UNSC ने दी चेतावनी, समुद्री सुरक्षा पर मंडराया बड़ा खतरा.

7 अगस्त 2026 को United Nations Security Council (UNSC) ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी में कहा गया है कि यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्र में जहाजों की आवाजाही पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है। यह घटनाक्रम यमन में फिर से शुरू हुई हिंसा के बाद सामने आया है, जो लंबे समय से चल रही शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है।
हमलों में तेज़ी और आम नागरिकों पर असर
6 अगस्त 2026 को यमन के गृहयुद्ध के दौरान बीते चार सालों का सबसे खूनी दिन देखा गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस दिन हुए हमलों में कम से कम 58 सरकारी सैनिक शहीद हो गए। यही नहीं, सऊदी अरब के दक्षिणी इलाके Najran में हुए हमले में 11 नागरिक घायल भी हुए। European Union ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि आम लोगों और उनके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
समुद्री व्यापार पर पड़ा बुरा असर
हूती विद्रोहियों द्वारा घोषित समुद्री नाकेबंदी के कारण व्यापार पर गहरा प्रभाव पड़ा है। 20 जुलाई को इस घोषणा के बाद से Bab el-Mandeb Strait से गुजरने वाले सऊदी टैंकरों की संख्या में 40 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई है। यह स्थिति न केवल सऊदी अरब के लिए बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की आपूर्ति के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है। यमन और सऊदी अरब के साथ मिलकर 12 अन्य देशों ने 30 जुलाई को एक Multinational Maritime Defence Alliance का गठन किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
खुफिया जानकारी और आगे का खतरा
वरिष्ठ सऊदी अधिकारियों की ओर से मिली खुफिया जानकारी के अनुसार, हूती विद्रोही और इराक में सक्रिय मिलिशिया के बीच सांठगांठ की खबरें आ रही हैं। कहा जा रहा है कि ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की देखरेख में ये समूह सऊदी अरब के हवाई अड्डों, बंदरगाहों और ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बना सकते हैं। यूएन के उप प्रवक्ता Farhan Haq ने यमन के सभी पक्षों से अपील की है कि वे किसी भी ऐसे कदम से बचें जो सैन्य तनाव को और ज्यादा भड़का दे। UNSC ने पहले ही 14 जुलाई को Resolution 2826 अपनाकर हूती हमलों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए थे। गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर सुरक्षा और दैनिक जीवन पर पड़ सकता है।