यमन की सरकार ने गंभीर खुलासा किया है कि हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में वही स्थिति पैदा करना चाहते हैं जो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में बनाए हुए है। यमन की विदेश मंत्री नामित Afrah al-Zouba ने 27 जुलाई 2026 को बताया कि हूती अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर अपना नियंत्रण जमाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अब तक उनकी हरकतों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे विद्रोही और अधिक उत्साहित हो गए हैं।

ईरान से मिल रही मदद और उड़ानों का विवाद

हूती विद्रोही लगातार ईरान के साथ सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने का दबाव बना रहे हैं। यमनी सरकार का कहना है कि इसके पीछे का असली मकसद सैन्य कर्मियों, हथियारों और फंड की कमी को पूरा करना है। यमन के उप विदेश मंत्री Mustafa Ahmed Noman ने 24 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि ईरान ने हाल ही में अपने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर और सैन्य सलाहकारों के साथ मिसाइल और ड्रोन उपकरण यमन भेजे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 जुलाई 2026 को ईरान की Mahan Air की एक फ्लाइट से 10 से 21 IRGC कर्मी और भारी सैन्य साजो-सामान हूतियों तक पहुँचाया गया। वहीं, ईरान और हूती अधिकारी इन दावों को गलत बताते हुए इसे मानवीय मिशन बताते रहे हैं।

समुद्री व्यापार पर खतरा

हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने 20 जुलाई 2026 को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है। बाब अल-मंदेब दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जहाँ से दुनिया का करीब 12 प्रतिशत व्यापार और 25 प्रतिशत कंटेनर ट्रैफिक गुजरता है। हूतियों ने अब तक इस इलाके में 100 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 25 जुलाई 2026 को इस विवाद में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए बातचीत का समर्थन किया है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.