यमन के हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई 2026 को सऊदी अरब के खिलाफ एक समुद्री प्रतिबंध की घोषणा की है। इस फैसले की जानकारी देते हुए हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने बताया कि यह कदम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसे ‘जैसे को तैसा’ नीति के तहत उठाया गया है। इस घोषणा के बाद से क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।
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समुद्री रास्तों पर खतरा
हूती विद्रोहियों ने आरोप लगाया है कि सऊदी अरब उनके बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर घेराबंदी कर रहा है और उनके संसाधनों का उपयोग कर रहा है। यह प्रतिबंध लाल सागर और Bab el-Mandeb Strait जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों को निशाना बनाता है। जानकारों का कहना है कि अगर यह जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद हो जाता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति में 7% तक की कमी आ सकती है, जिससे सऊदी तेल निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा।
तनावपूर्ण स्थिति और पुराना इतिहास
यह घटनाक्रम 16 जुलाई 2026 को दी गई चेतावनी के बाद हुआ है, जिसमें हूतियों ने सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बनाने की बात कही थी। यह तनाव 13 जुलाई को सना हवाई अड्डे पर हुए कथित सऊदी बमबारी के बाद और गहरा गया, जिसने चार साल पुराने संघर्ष विराम को तोड़ दिया। संयुक्त राष्ट्र ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ सकता है। यमन की सरकार का तेल निर्यात पहले से ही अक्टूबर 2022 से रुका हुआ है, जिससे देश को अपने राजस्व का लगभग 70% नुकसान उठाना पड़ रहा है।
