यमन के हूती समूह ने इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के एक महीने बाद इजरायल पर अपना पहला मिसाइल हमला किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने पुष्टि की है कि उन्होंने दक्षिणी इजरायल के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें छोड़ी हैं। यह हमला ईरान, फिलिस्तीन और लेबनान के समर्थन में किया गया है। इजरायली सेना ने यमन की ओर से आई इस मिसाइल को पहचानने और उसे हवा में ही नष्ट करने की जानकारी दी है।

हूती समूह के हमले के पीछे का कारण और उनकी मांगें क्या हैं?

हूती प्रवक्ता याह्या सारी ने स्पष्ट किया है कि ये हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक फिलिस्तीन, लेबनान और ईरान के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई बंद नहीं हो जाती। हूतियों ने अपनी सैन्य भागीदारी के लिए कुछ शर्तें रखी हैं, जिनमें लाल सागर (Red Sea) का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न करना और यमन की घेराबंदी को पूरी तरह खत्म करना शामिल है। समूह के नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे ईरान के साथ मजबूती से खड़े हैं और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार हैं।

इस हमले का क्षेत्रीय शांति और समुद्री रास्तों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि यमन की इस हरकत से खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ सकता है। इसका सीधा असर लाल सागर और स्वेज नहर (Suez Canal) के जरिए होने वाले समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिका और सऊदी अरब इस कोशिश में लगे हैं कि हूतियों को इस संघर्ष से दूर रखा जाए ताकि युद्ध और बड़े स्तर पर न फैले। इस स्थिति के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • इजरायली सेना ने यमन से आई मिसाइल को मार गिराया है।
  • हूतियों ने ईरान और प्रतिरोध मोर्चों (Resistance Fronts) के समर्थन का संकल्प लिया है।
  • सऊदी अरब और अमेरिका युद्ध को और ज्यादा बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
  • इस हमले से लाल सागर के जहाजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है।
Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com