यमन के हूती विद्रोहियों ने ईरान के साथ मिलकर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सैन्य मोर्चे पर उतरने का बड़ा ऐलान किया है। हूती आंदोलन के नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने 26 मार्च 2026 को दिए अपने संबोधन में कहा कि उनके पास सभी विकल्प खुले हैं और वे किसी भी समय युद्ध में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस घटनाक्रम से मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है और लाल सागर के रास्ते होने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
हूती गुट ने युद्ध की तैयारी को लेकर क्या जानकारी दी?
हूतियों की ओर से जारी बयानों और ईरान की सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार सैन्य तैयारियां काफी समय से चल रही हैं। इस मामले में मुख्य तथ्य नीचे दिए गए हैं:
- 26 मार्च 2026: हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने टीवी पर आकर सेना को पूरी तरह तैयार रहने का आदेश दिया।
- 25 मार्च 2026: ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि अगर ईरान की जमीन पर हमला हुआ तो हूती बाब अल-मंडब में नया मोर्चा खोल देंगे।
- फरवरी 2026: हूतियों ने फरवरी के आखिरी दिनों से ही अपने लड़ाकों को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है।
- रॉयटर्स की रिपोर्ट: एक हूती अधिकारी ने कहा कि वे तेहरान के समर्थन में रेड सी में दोबारा हमले शुरू कर सकते हैं।
लाल सागर और समुद्री व्यापार पर क्या असर होगा?
लाल सागर और बाब अल-मंडब का रास्ता दुनिया भर के जहाजों के लिए बहुत जरूरी है। अगर यहां युद्ध की स्थिति बनती है तो इसका सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत जैसे देशों के व्यापार पर पड़ेगा।
जानकारों का कहना है कि हूती और ईरान मिलकर इस रास्ते को प्रभावित करने या जहाजों को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं। इससे तेल और अन्य सामानों की सप्लाई रुक सकती है जिससे महंगाई बढ़ने का डर रहता है। गल्फ देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि समुद्री मार्ग प्रभावित होने से जरूरी सामानों की कीमतों में बदलाव आ सकता है। फिलहाल अमेरिका और इजरायल की सेनाएं भी इस पूरे इलाके में कड़ी निगरानी रख रही हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
