यमन के प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया है कि हूती विद्रोहियों ने 2024 के दौरान चार विमानों पर कब्जा किया और सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उनकी उड़ानें रोक दीं। यह दावा यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष और हवाई अड्डे की सुरक्षा को लेकर फिर से गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, हूती समूह ने न केवल विमानों को अपने नियंत्रण में लिया, बल्कि एयरपोर्ट पर संचालन भी बाधित किया। इससे यात्रियों की आवाजाही, सामान्य उड़ान सेवाएं और मानवीय पहुंच पर असर पड़ा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है।
सना एयरपोर्ट क्यों अहम है
सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा यमन की राजधानी और सबसे संवेदनशील बुनियादी ढांचों में से एक माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में यह एयरपोर्ट बार-बार संघर्ष, हमलों और उड़ान प्रतिबंधों की वजह से सुर्खियों में रहा है। 2025 में इजराइली हवाई हमलों के बाद भी इस एयरपोर्ट को भारी नुकसान पहुंचा और उड़ानें निलंबित करनी पड़ी थीं।
रिपोर्टों के अनुसार, 2025 के मई में हुए हमलों के बाद सना एयरपोर्ट को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया था। उस समय एयरपोर्ट के टर्मिनल और अन्य ढांचों को गंभीर नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई थीं।
