यमन में भुखमरी का संकट अब और भी गहरा गया है। खाने-पीने की चीजों के दाम इतनी तेजी से बढ़े हैं कि आम लोगों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया है। ऊपर से अंतरराष्ट्रीय मदद का रुकना और सामान आने वाले रास्तों में रुकावट ने हालात को और खराब कर दिया है। अब वहां लाखों लोग दाने-दाने को तरस रहे हैं।
यमन में खाने की किल्लत और बढ़ती कीमतों की क्या वजह है?
यमन अपनी जरूरत के 80 से 90 प्रतिशत अनाज के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। लाल सागर और बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य में जहाजों के आने-जाने में रुकावट के कारण सामान महंगा हो गया है। अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और क्षेत्रीय लड़ाई की वजह से आयात का खर्च बढ़ गया है, जिससे बाजार में खाने-पीने की चीजें महंगी बिक रही हैं।
UN की मदद क्यों रुकी और इसका क्या असर हुआ?
हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाकों में UN के कामकाज पर पूरी तरह रोक लगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, UN के कर्मचारियों को हिरासत में लिए जाने और कामकाज में रुकावट डालने के कारण World Food Programme (WFP) ने अपने 365 कर्मचारियों के कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिए। इस वजह से उन इलाकों में मदद नहीं पहुंच पा रही है, जिससे भुखमरी और बढ़ गई है।
यमन के मौजूदा हालात का पूरा ब्यौरा
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| तीव्र खाद्य असुरक्षा का सामना करने वाले लोग | 18.3 मिलियन |
| मानवीय सहायता की जरूरत वाले लोग | 22.3 मिलियन |
| कुपोषित बच्चे (5 साल से कम) | 2.2 मिलियन |
| UN अपील के लिए मिली फंडिंग | 29% |
| हिरासत में लिए गए UN कर्मचारी | 73 |
UN की OCHA संस्था ने सुरक्षा परिषद को बताया कि यमन की लगभग आधी आबादी को मानवीय मदद की जरूरत है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं, अमेरिकी राजदूत टैमी ब्रूस ने हूती विद्रोहियों पर UN दफ्तरों से सामान हटाने और मानवीय उड़ानों को रोकने का आरोप लगाया है।
