यमन में युद्ध रोकने की कोशिशें तो हो रही हैं, लेकिन ज़मीन में दबी बारूदी सुरंगें अब भी लोगों के लिए काल बनी हुई हैं। एक पीड़ित ने अपना दर्द बताते हुए कहा कि वह शाम के समय पहाड़ी इलाके में चल रहा था, तभी पैर के नीचे सुरंग आई और धमाके के बाद उसका बायां पैर अलग हो गया। यहाँ आम नागरिक और मासूम बच्चे सबसे ज़्यादा खतरे में हैं क्योंकि उन्हें इन छिपे हुए खतरों की जानकारी नहीं है।

यमन में बच्चों की जान पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?

Save the Children की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2022 के शांति समझौते के बाद से अब तक करीब 1,200 बच्चे मारे गए या घायल हुए। इस रिपोर्ट के कुछ मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • कुल बाल हताहतों में से 511 बच्चे बारूदी सुरंगों और युद्ध के अवशेषों की वजह से घायल हुए।
  • बड़ों के मुकाबले बच्चों के प्रभावित होने की संभावना तीन गुना ज़्यादा है।
  • बच्चे अक्सर लकड़ी इकट्ठा करने या जानवरों को चराने के दौरान इन सुरंगों के संपर्क में आते हैं।

सुरंगें हटाने के लिए क्या काम हो रहा है और कितना खतरा है?

सऊदी अरब की मदद से चलने वाला Project Masam यमन में इन सुरंगों को हटाने के लिए काम कर रहा है। इस अभियान के आंकड़े इस प्रकार हैं:

विवरण आंकड़े
अप्रैल 2026 में हटाए गए विस्फोटक 4,545 आइटम
अप्रैल 2026 में सुरक्षित की गई ज़मीन 7,95,813 वर्ग मीटर
जुलाई 2018 से अब तक हटाए गए कुल खतरे 5,55,734 आइटम
अब तक सुरक्षित की गई कुल ज़मीन 78,790,403 वर्ग मीटर

अनुमान है कि 2014 के बाद से हूती बलों ने देश भर में 10 लाख से 20 लाख के बीच सुरंगें बिछाई हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेष दूत ने भी चिंता जताई कि हज़ारों लोग हर साल इन अवशेषों की वजह से अपनी जान गंवा रहे हैं और उन्होंने दुनिया भर से इस काम में मदद मांगी है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com