Yemen Marib Attack: यमन के मारिब में हूती विद्रोहियों का मिसाइल और ड्रोन हमला, सेना ने दिया करारा जवाब

Nura Basta11 August 20263 min read73 viewsYemen
Yemen Marib Attack: यमन के मारिब में हूती विद्रोहियों का मिसाइल और ड्रोन हमला, सेना ने दिया करारा जवाब

यमन के मारिब शहर में 11 अगस्त 2026 को उस समय भारी धमाके सुने गए जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर एक बार फिर से बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इन लगातार हमलों के बाद यमन की सेना ने भी तुरंत मोर्चा संभाला और शबवा तथा मारिब दोनों ही इलाकों में हूती विद्रोहियों के कमांड सेंटर, ड्रोन लॉन्च करने वाली जगहों और मिसाइल प्लेटफार्म्स पर भारी तोपखाने से जवाबी कार्रवाई की। यमन की सेना ने साफ तौर पर कहा कि हूती विद्रोही लगातार आम नागरिकों की जगहों, बुनियादी ढांचे और लोगों के घरों को जानबूझकर निशाना बना रहे हैं, जिससे आम जनता की मुसीबतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं।

पुराने हमलों का इतिहास और बढ़ता तनाव

यह हालिया तनाव अचानक पैदा नहीं हुआ है बल्कि इससे पहले भी 7 और 8 अगस्त 2026 को हूती विद्रोहियों ने मारिब के विस्थापन शिविरों और रिहायशी इलाकों में खूनी हमले किए थे। यमन की सरकारी समाचार एजेंसी SABA से मिली जानकारी के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 2 लोगों की मौत हो गई थी और 14 लोग घायल हुए थे, जिनमें कई बेकसूर महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। लगातार हो रहे इन हमलों से आम लोगों का जीवन नर्क बन गया है और लोग सुरक्षित जगहों की तलाश में इधर-उधर भागने को मजबूर हो रहे हैं।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और चेतावनी

हूती विद्रोहियों की इन हरकतों को देखते हुए कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। 10 अगस्त को यमन की विदेश मंत्री अफराह अल-ज़ोबा (Afrah al-Zouba) ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को कड़ी चेतावनी दी थी कि हूती संगठन जिस तरह से लगातार सैन्य और नागरिक ठिकानों, बंदरगाहों और समुद्री जहाजों पर हमले कर रहा है, उससे यह पूरा संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा संकट में बदल सकता है। उन्होंने दुनिया का ध्यान इस बात की तरफ खींचा कि कैसे हूती मिलिशिया सीधे तौर पर ईरान के हितों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में शांति को तबाह करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक मामलों की अवर महासचिव रोजमेरी डिकार्लो (Rosemary DiCarlo) ने भी ऐसे सभी हमलों का कड़ा विरोध किया और तुरंत मारमार और आसपास के इलाकों में हिंसा रोकने की अपील की।

सऊदी-नीत गठबंधन और संयुक्त राष्ट्र की सख्त नजर

यमन की सरकार का समर्थन कर रहे सऊदी-नीत गठबंधन (Saudi-led Coalition) ने पहले ही 7 अगस्त को यह साफ कर दिया था कि अगर मारिब पर हूती हमले इसी तरह बढ़ते रहे तो वे चुपचाप नहीं बैठेंगे और इसे एक बड़ी 'रेड लाइन' माना जाएगा। इसके अलावा, यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग (Hans Grundberg) ने भी 8 अगस्त को गहरी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि मारिब और हरामौत में हो रहे ताज़ा हमलों के साथ-साथ कमर्शियल जहाजों पर फिर से शुरू हुए हमलों की वजह से अप्रैल 2022 में हुए संघर्ष विराम के बाद से यमन एक बार फिर सबसे बड़े पैमाने पर युद्ध की आग में घिरने के खतरे के मुहाने पर खड़ा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इस बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि इन हरकतों से क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री नेविगेशन के अधिकारों को भारी खतरा पैदा हो रहा है।

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