यमन की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। वहां की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने ऐदरस अल-जुबैदी को उनके पद से हटा दिया है। उन पर देशद्रोह के गंभीर आरोप लगाए गए हैं और मामले की जांच के लिए उन्हें अटॉर्नी जनरल के पास भेजा गया है।
यह पूरा मामला जनवरी 2026 का है जब काउंसिल के चेयरमैन डॉ. रशद अल-अलीमी ने इस फैसले पर साइन किए थे। अल-जुबैदी पर आरोप है कि उन्होंने यमन की आजादी और संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। उन पर सशस्त्र गिरोह बनाने, सैन्य अधिकारियों की हत्या में शामिल होने और सरकारी संस्थानों पर हमला करने जैसे संगीन इल्जाम लगे हैं। साथ ही उन पर यह आरोप भी है कि उन्होंने दक्षिण यमन के मुद्दे का गलत इस्तेमाल किया और आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा की।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने बताया कि अल-जुबैदी को रियाद में बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे वहां जाने के बजाय किसी अज्ञात स्थान पर चले गए। गठबंधन का दावा है कि अल-जुबैदी ने अशांति फैलाने के मकसद से हथियारों का वितरण किया और अपनी सेना को मोबिलाइज किया।
ऐदरस अल-जुबैदी, जो Southern Transitional Council (STC) के प्रमुख हैं, उनके ठिकाने को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार वे सोमालीलैंड के रास्ते UAE चले गए, जबकि STC ने दावा किया कि वे अदन में ही मौजूद हैं।
प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि कानून का शासन बनाए रखने के लिए किसी भी तरह की उल्लंघन बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हथियारों के वितरण और शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उनकी गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं।