यमन के राष्ट्रपति के सलाहकार ने देश की सभी राजनीतिक पार्टियों और सरकारी संस्थाओं से राष्ट्रपति परिषद और गठबंधन का पूरा साथ देने की अपील की है। यह मांग तब आई जब ईरान से सना एयरपोर्ट के लिए एक सीधी फ्लाइट चली, जिससे यमन सरकार काफी नाराज है। इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति परिषद की एक इमरजेंसी मीटिंग भी बुलाई गई थी।

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ईरान की फ्लाइट पर नाराजगी

4 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति डॉ. रशाद मोहम्मद अल-अलीमी की अध्यक्षता में एक खास बैठक हुई। इस बैठक में ईरान से सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जो कि हूती मिलिशिया के कब्जे में है, वहां सीधी फ्लाइट चलाने पर कड़ी आपत्ति जताई गई। परिषद ने इसे यमन की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है। बैठक में प्रधानमंत्री डॉ. शया अल-ज़िंदानी और अन्य मंत्रियों ने भी अपनी बात रखी।

यमन की राष्ट्रपति परिषद ने साफ कहा कि हूती मिलिशिया इस समय देश में चल रहे नाकेबंदी और लोगों की बदतर हालत के लिए जिम्मेदार है। सरकार का कहना है कि ईरान की इस हरकत से न केवल यमन बल्कि पूरे इलाके की सुरक्षा को खतरा है। परिषद ने चेतावनी दी है कि यमन अपनी हवाई सीमा और बॉर्डर की सुरक्षा के लिए सभी कानूनी और सुरक्षा कदम उठाएगी।

सऊदी अरब का साथ और गठबंधन की चेतावनी

बैठक के दौरान सऊदी अरब की तारीफ की गई, क्योंकि वह यमन में शांति और स्थिरता लाने की कोशिश कर रहा है। परिषद ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से भी अपील की है कि वे सिर्फ बयान न दें, बल्कि ईरान की इन हरकतों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाएं।

दूसरी तरफ, ‘Coalition to Restore Legitimacy’ के कमांड ने एक सख्त बयान जारी किया है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने कहा कि अगर सऊदी अरब, उसके नागरिकों या यमन की संप्रभुता पर कोई हमला हुआ, तो उसका जवाब बहुत कड़ी और बड़ी कार्रवाई से दिया जाएगा। उन्होंने हूती मिलिशिया पर आरोप लगाया कि वे अपनी नाकामियों और आर्थिक संकट से ध्यान हटाने के लिए सऊदी अरब के खिलाफ बयान दे रहे हैं।