यमन के प्रधानमंत्री Shaya Mohsen al-Zindani ने रविवार, 26 जुलाई 2026 को लाल सागर में हूतियों द्वारा किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि कमर्शियल जहाजों पर हो रहे ये हमले ‘ईरान के एजेंडे’ का हिस्सा हैं, जिनका मकसद क्षेत्रीय और वैश्विक समुद्री सुरक्षा को बिगाड़ना है। यमन सरकार ने एक औपचारिक बयान जारी कर इन हमलों को पूरी तरह गलत ठहराया है।
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अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत
प्रधानमंत्री al-Zindani ने जोर देकर कहा कि समुद्री रास्तों और जहाजों की सुरक्षा करना पूरी दुनिया की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से हूतियों के इस ‘आतंकवादी व्यवहार’ के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की है ताकि उनकी फंडिंग के रास्तों को बंद किया जा सके। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उनकी सरकार सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ मिलकर इन खतरों का सामना करने के लिए लगातार काम कर रही है।
क्षेत्रीय तनाव और सैन्य प्रतिक्रिया
इस बीच, क्षेत्र में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने 24 जुलाई 2026 को हूतियों द्वारा हमले फिर से शुरू करने पर गहरी चिंता जताई और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके जवाब में, सऊदी गठबंधन ने 26 जुलाई को हूतियों के सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। यह हमला हूतियों द्वारा 25 जुलाई को सऊदी अरब के Jizan और Yanbu में तेल सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने के दावे के बाद किया गया है।
