यमन के राष्ट्रपति ने हुथी विद्रोहियों पर एक बहुत गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हुथियों ने सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह चोरी की और उस पैसे का इस्तेमाल हथियार खरीदने के लिए किया। यह खबर उन कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका है जो अपनी सैलरी का इंतज़ार कर रहे थे।
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राष्ट्रपति Rashad Al-Alimi ने कहा कि हुथियों ने युद्धविराम (truce) के समय का गलत फायदा उठाया। इस दौरान उन्होंने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाई और खतरनाक हथियार जमा किए। राष्ट्रपति के मुताबिक, जिस पैसे से आम कर्मचारियों का घर चलना चाहिए था, उससे युद्ध की तैयारी की गई।
अल हुदैदाह में भीषण लड़ाई और सैनिकों की मौत
हाल ही में 5 जुलाई 2026 को दक्षिणी Al Hudaydah प्रांत में बहुत खूनी लड़ाई हुई। इस टकराव में सरकारी सेना के 15 जवान और हुथी समूह के 50 लड़ाके मारे गए। स्थिति इतनी खराब थी कि राष्ट्रपति Rashad Al-Alimi ने सरकारी बलों को पूरी तरह अलर्ट रहने का आदेश दिया है।
सैन्य अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में स्नाइपर, ड्रोन और मोर्टार का इस्तेमाल किया गया। इसे पिछले कई सालों का सबसे घातक हमला माना जा रहा है।
करोड़ों डॉलर की लूट और मानवीय संकट
यमन के UN प्रतिनिधि Khaled al-Yamani ने पहले भी खुलासा किया था कि हुथी मिलिशिया ने 2017 से 2020 के बीच करीब 7 अरब अमेरिकी डॉलर लूटे। यह पैसा युद्ध के लिए और निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया, जबकि कर्मचारियों को उनकी सैलरी नहीं दी गई।
United Nations की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि यमन के लोग बुनियादी सुविधाओं की कमी और सैलरी में देरी से परेशान हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक जीवन को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है।
- UN स्टाफ की गिरफ्तारी: हुथियों ने UN के 73 कर्मचारियों को हिरासत में ले रखा है, जिससे मदद पहुँचाने के काम में दिक्कत आ रही है।
- मानवाधिकार संगठनों की चेतावनी: Human Rights Watch और Amnesty International ने हुथियों से हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की माँग की है।
- भूख का खतरा: सहायता कार्यों में रुकावट के कारण यमन में भुखमरी की स्थिति और खराब होती जा रही है।
