Yemen President Statement: यमन के राष्ट्रपति का बड़ा बयान, हूती मिलिशिया स्वतंत्र नहीं बल्कि ईरान के प्रोजेक्ट का एक हथियार है.
यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशद अल-अलीमी ने हूती मिलिशिया को लेकर एक अहम जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया है कि हूती मिलिशिया कोई स्वतंत्र संगठन नहीं है बल्कि यह ईरान के विनाशकारी प्रोजेक्ट का एक हिस्सा मात्र है। इस बयान के बाद खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हूतियों की भूमिका को लेकर फिर से बहस शुरू हो गई है। यमन सरकार का मानना है कि हूती समूह का ईरान के समर्थन में आगे आना उनकी असलियत को सबके सामने लाता है।
हूती मिलिशिया को लेकर यमन सरकार का क्या रुख है?
चेयरमैन रशद अल-अलीमी का कहना है कि हूतियों का ईरान के पक्ष में खड़ा होना यह साफ करता है कि वे एक कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं। यमन की सरकार ने पहले भी कई बार चेतावनी दी थी कि हूती समूह यमन की जमीन का इस्तेमाल करके पड़ोसी देशों को डराने की कोशिश कर रहा है। काउंसिल ने अपनी सुरक्षा और सैन्य तैयारी को भी बढ़ा दिया है ताकि किसी भी तरह के खतरे का सामना किया जा सके। अल-अलीमी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि हूतियों को एक वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया जाए और उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं ताकि लाल सागर को सुरक्षित रखा जा सके।
हालिया हमलों और क्षेत्रीय तनाव का पूरा विवरण क्या है?
पिछले कुछ दिनों में हूती मिलिशिया की गतिविधियों में काफी तेजी देखी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हूतियों ने इज़राइल की तरफ कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इन हमलों का विवरण नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं:
| तारीख | घटनाक्रम |
|---|---|
| 28 मार्च – 1 अप्रैल 2026 | इज़राइल की सीमा पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए गए। |
| 4 – 6 अप्रैल 2026 | हूतियों ने कई और हमलों की जिम्मेदारी ली। |
| 8 अप्रैल 2026 | क्षेत्र में युद्धविराम लागू होने की खबर आई। |
| 9 अप्रैल 2026 | हूतियों ने फिर से बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से 9 हमले किए। |
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि हूती अपने फैसले खुद लेते हैं और ईरान को किसी प्रॉक्सी की जरूरत नहीं है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र और अन्य खाड़ी देशों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के दूत हंस ग्रंडबर्ग ने चेतावनी दी है कि इस तरह के हमलों से यमन में मानवीय संकट और गहरा सकता है और शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है।




