यमन के संकट में फंसे हज़ारों परिवारों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है जिसके तहत 1,600 से अधिक कैदियों को रिहा किया जाएगा। यह पिछले 11 सालों की जंग में अब तक का सबसे बड़ा प्रिजनर एक्सचेंज है जिसे ओमान और जॉर्डन के सहयोग से मुमकिन बनाया गया है।
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कितने कैदियों की होगी रिहाई और कौन-कौन शामिल हैं?
इस समझौते के तहत कुल 1,600 से 1,750 के बीच कैदियों को आज़ाद किया जाएगा। इसमें लगभग 1,100 हूती समर्थक कैदी और 580 सरकारी पक्ष के बंदी शामिल हैं। सरकारी पक्ष की रिहाई होने वाले लोगों में 7 सऊदी और 20 सूडानी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा इसमें सुरक्षा बलों, पत्रकारों और राजनेताओं को भी शामिल किया गया है। समझौते में एक खास बात यह भी है कि एक संयुक्त कमेटी सना जाएगी ताकि 11 साल से कैद इस्लाह पार्टी के नेता मोहम्मद काहतान के बारे में सही जानकारी जुटाई जा सके।
इस समझौते के पीछे किन देशों और संस्थाओं का हाथ है?
इस बड़ी कामयाबी की शुरुआत दिसंबर 2025 में ओमान की राजधानी मस्कट में हुई बातचीत से हुई थी। इसके बाद जॉर्डन के अम्मान में 14 हफ़्तों तक बातचीत चली जिसमें 5 फरवरी से 6 मई 2026 तक सीधी चर्चा हुई। आखिरकार 14 मई 2026 को इस समझौते पर आधिकारिक तौर पर दस्तखत कर दिए गए। इस पूरी प्रक्रिया में UN के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग और इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) ने अहम भूमिका निभाई। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय और UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।
कैदियों की रिहाई का पूरा काम ICRC की देखरेख में पूरा किया जाएगा हालांकि अभी रिहाई शुरू होने की सटीक तारीख का ऐलान नहीं हुआ है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यह समझौता यमन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह 11 साल के गृहयुद्ध में अब तक का सबसे बड़ा कैदी विनिमय है जिसमें 1,600 से अधिक लोगों की रिहाई होगी। इससे युद्ध से प्रभावित हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया कौन संभालेगा?
रिहाई की पूरी प्रक्रिया का समन्वय International Committee of the Red Cross (ICRC) द्वारा किया जाएगा।
