यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (PLC) के चेयरमैन Rashad al-Alimi ने 21 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने साफ किया कि यमन के भविष्य के फैसले देश की मजबूती और जनता की इच्छा के आधार पर लिए जाएंगे, न कि किसी धमकी या दबाव के तहत। इस नीति के साथ ही यमन ने 2022 से बंद पड़े अपने तेल निर्यात को फिर से शुरू कर दिया है।

🗞️: यमन में फिर बढ़ा तनाव: हूतियों ने दी समुद्री नाकेबंदी की धमकी, सऊदी अरब और राष्ट्रपति अल-अलीमी ने जताया विरोध

तेल से होने वाली कमाई का इस्तेमाल

सरकार ने तय किया है कि तेल बेचकर जो भी पैसा आएगा, उसका इस्तेमाल सरकारी बजट को मजबूत करने, सरकारी कर्मचारियों का वेतन देने और जनता के लिए जरूरी सुविधाएं बेहतर करने के लिए किया जाएगा। इससे यमन की गिरती अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।

हुथी मिलिशिया के खिलाफ कड़ा रुख

Rashad al-Alimi ने कहा कि यमन की स्थिरता तभी संभव है जब सरकारी संस्थानों को पूरी तरह बहाल किया जाए। उन्होंने हुथी मिलिशिया की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे मानवीय मदद के प्रयासों को लगातार ठुकरा रहे हैं और देश की जनता की तकलीफों का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने देश की सुरक्षा एजेंसियों और नागरिकों से अपील की कि वे एकजुट होकर सरकारी तंत्र को दोबारा खड़ा करने में मदद करें।

ईरानी हस्तक्षेप पर सरकार सख्त

यमन की कैबिनेट ने Dr. Shaya Zindani के नेतृत्व में ईरान द्वारा यमन की संप्रभुता के उल्लंघन का मामला उठाया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी विदेशी विमान को यमन के किसी भी हवाई अड्डे पर उतरने के लिए सीधे यमन की वैध सरकार से अनुमति लेनी होगी। सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा ईरानी हस्तक्षेप की निंदा किए जाने का भी स्वागत किया है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.