यमन के सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Sanaa International Airport) को लेकर विवाद गहरा गया है। यमन की सरकार ने कहा है कि हुथियों की एकतरफा हरकतों की वजह से एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स शुरू करने की कोशिशों को बड़ा नुकसान पहुँचा है। यह पूरा मामला ईरान से आने वाली फ्लाइट्स और हुथियों के रवैये को लेकर शुरू हुआ है।
पूरा मामला जुलाई की शुरुआत का है जब ईरान से एक नागरिक विमान सना एयरपोर्ट पहुँचा था। बताया गया कि इस फ्लाइट में मरीज, घायल लोग और अयातुल्ला अली खामनेई के जनाजे में शामिल होने वाले हुथी प्रतिनिधि सवार थे। इस घटना के बाद सना एयरपोर्ट के डायरेक्टर खालिद अल-शेफ ने नए रूट्स शुरू करने की बात कही। उन्होंने ऐलान किया कि चाहे जो भी कीमत चुकानी पड़े, वे एयरपोर्ट को जबरन खोलेंगे। यह बात उन्होंने तब कही जब मई 2026 में इसराइल के हवाई हमलों में एयरपोर्ट को काफी नुकसान पहुँचा था।
सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रतिक्रिया
रियाद में स्थित यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने ईरान की इस सीधी फ्लाइट को यमन की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। काउंसिल का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र (UN) के नियमों की सरेआम अनदेखी है। काउंसिल ने आरोप लगाया कि हुथी पूरी तरह से ईरान के एजेंडे पर काम कर रहे हैं।
काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी ने इस मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इस फ्लाइट में मानवीय मदद के बजाय सैन्य उपकरण और जवान हो सकते हैं। काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वे केवल निंदा न करें, बल्कि हुथियों के खिलाफ ठोस कदम उठाएं।
सऊदी गठबंधन की चेतावनी और मौजूदा हालात
यमन सरकार का समर्थन कर रहे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर सऊदी अरब को निशाना बनाया गया या यमन की संप्रभुता को चुनौती दी गई, तो वे अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई करेंगे।
यमन के प्रधानमंत्री सालेम बिन बुरैक ने हुथियों पर शांति प्रयासों में बाधा डालने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हुथियों की इन हरकतों से देश का आर्थिक और मानवीय संकट और ज्यादा बढ़ गया है। फिलहाल सना एयरपोर्ट की स्थिति बहुत अस्थिर है और यहाँ फ्लाइट्स का संचालन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। यमन के हवाई क्षेत्र को अभी भी एक सक्रिय युद्ध क्षेत्र माना जा रहा है।
