यमन के ताइज़ (Taiz) शहर में रहने वाले परिवार इन दिनों बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। यहाँ के लोग एक तरफ स्नाइपर के निशाने पर जीने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई ने उनका जीना दूभर कर दिया है। 25 जुलाई 2026 को जारी किए गए एक आधिकारिक ट्वीट में लोगों का दर्द सामने आया, जिसमें कहा गया कि युद्ध ने सब कुछ छीन लिया है और अब सिर्फ अपनी जान बचाने की जद्दोजहद बची है।

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ताइज़ में बिगड़ते हालात और आर्थिक तंगी

आंकड़ों के मुताबिक, ताइज़ में अब तक 10,000 से ज्यादा घर या तो पूरी तरह तबाह हो गए हैं या उन्हें आंशिक नुकसान पहुंचा है। घर की कमी और गरीबी के कारण उम यूसुफ जैसी अकेली मां भी उन्हीं इलाकों में रहने को मजबूर हैं जो उनके लिए असुरक्षित हैं। पिछले साल यमन में स्नाइपर हमले में मारे गए कुल नागरिकों में से 66% अकेले ताइज़ शहर के थे। इनमें से 21 बच्चों में से 9 बच्चों की मौत इसी शहर में हुई, जिसकी वजह यहां की पहाड़ी बनावट है जहां से स्नाइपर आसानी से निशाना बना लेते हैं।

मानवीय संकट और सहायता की कमी

पूरे यमन की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां करीब 18 मिलियन लोग यानी 53% से ज्यादा आबादी भुखमरी की कगार पर है। साल 2026 के लिए बनाई गई मानवीय मदद योजना को अब तक 15% से भी कम फंड मिला है, जिससे करीब 1.8 बिलियन डॉलर की कमी पैदा हो गई है। इसका असर यह है कि अब खाद्य सहायता सिर्फ 1.2 मिलियन लोगों तक ही पहुंच पाएगी और उन्हें भी बहुत कम राशन मिलेगा।

ताइज़ में ईंधन की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। जून के महीने में डीजल की कीमतों में 56% का भारी उछाल आया है, जिससे राहत सामग्री और स्वास्थ्य सेवाओं का पहुंचना मुश्किल हो गया है। बिजली का ग्रिड काम नहीं करने के कारण लोग खतरनाक विकल्पों को अपनाने को मजबूर हैं। जुलाई 2026 में हुई एक घटना में सोलर पावर सिस्टम फटने से एक मां और उसके दो बच्चों की जान चली गई थी।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.