संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) ने यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उनके द्वारा बंधक बनाए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं और संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों को तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा करने की मांग की है। परिषद ने इन गिरफ्तारियों की कड़े शब्दों में निंदा की है। जून 2024 में बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों के अब दो साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन इस संकट का अभी तक कोई भी समाधान नहीं निकल सका है।

सुरक्षा परिषद ने हूती विद्रोहियों को लेकर क्या चेतावनी जारी की है?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य देशों ने हूती विद्रोहियों द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों की सुरक्षित और तत्काल रिहाई की मांग को एक बार फिर से दोहराया है। परिषद ने साफ तौर पर कहा है कि राहत और मानवीय सहायता पहुंचाने वाले कर्मियों को किसी भी तरह की धमकी देना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इन गिरफ्तारियों की वजह से यमन में पहले से ही खराब चल रहे मानवीय हालात और भी ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं, जिससे वहां के आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कितने कर्मचारी और कब से हूती विद्रोहियों के कब्जे में हैं?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले चार सालों के दौरान अलग-अलग चरणों में संयुक्त राष्ट्र के करीब 73 कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है। कुछ लोगों को पिछले पांच सालों से बंधक बनाकर रखा गया है, जिनमें से अधिकतर यमन के स्थानीय नागरिक ही हैं। सुरक्षा परिषद ने बंधक बनाए गए इन सभी कर्मियों की भलाई और सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है और उनकी रिहाई के लिए वैश्विक स्तर पर दबाव बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सुरक्षा परिषद ने हूती विद्रोहियों को लेकर क्या चिंता जताई है?

सुरक्षा परिषद ने कहा कि मानवीय सहायता पहुंचाने वाले राहत कर्मियों को बंधक बनाना पूरी तरह गलत है। इस हरकत से यमन में मानवीय सहायता पहुंचाने का काम प्रभावित हो रहा है और वहां के हालात बदतर हो रहे हैं।

यमन में कितने संयुक्त राष्ट्र कर्मियों को बंधक बनाया गया है?

पिछले चार सालों के दौरान संयुक्त राष्ट्र के लगभग 73 कर्मचारियों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को हूती विद्रोहियों द्वारा हिरासत में लिया गया है, जिनमें से कई लोग पिछले पांच सालों से बंद हैं।