लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में तनाव काफी बढ़ गया है। 21 जुलाई 2026 को यमन के सूचना मंत्री Mu’ammar al-Eryani ने चेतावनी दी कि ईरान इस क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान हूतियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों को बंद करने की साजिश रच रहा है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति जैसा ही है।
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हूतियों की धमकी और सऊदी जहाजों पर संकट
20 और 21 जुलाई 2026 को हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree और उप मीडिया प्रमुख Nasruddin Amer ने घोषणा की कि वे बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले सऊदी अरब के जहाजों पर समुद्री नाकेबंदी लगाएंगे। हूतियों का कहना है कि यह कदम पिछले 10 वर्षों से यमन में सऊदी अरब द्वारा लगाए गए ‘अन्यायपूर्ण प्रतिबंध’ और सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हालिया हमलों का बदला है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय चिंता
इससे पहले 16 जुलाई 2026 को खबरें आई थीं कि अगर अमेरिका ईरान के पावर नेटवर्क पर हमला करता है, तो ईरान हूतियों को लाल सागर में शिपिंग रोकने का निर्देश देगा। इसके अलावा, 9 जून 2026 को IRGC के कमांडर Esmail Qaani ने होर्मुज से बाब अल-मंदेब तक एक ‘सुरक्षा घेरा’ बनाने की चेतावनी दी थी।
इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इस नाकेबंदी की निंदा की है और यमन की अदन-स्थित सरकार का समर्थन दोहराया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता Stephane Dujarric ने चिंता जताई है कि हूतियों का यह कदम क्षेत्रीय संघर्ष को और अधिक विस्तार दे सकता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने भी 21 जुलाई को बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका जताई है। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण लगभग 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिसका सीधा असर समुद्री व्यापार पर पड़ रहा है।
