यमन के मारिब में भड़की हिंसा, सरकारी सेना और हौथी मिलिशिया के बीच जबरदस्त संघर्ष जारी.

यमन में हालात एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। 21 अगस्त 2026 को मिली रिपोर्ट के अनुसार, यमन की सरकारी सेना ने मारिब शहर के उत्तर-पश्चिम इलाकों में हौथी मिलिशिया के खिलाफ बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई शुरू की। यह कदम पिछले 24 घंटों के दौरान उठाए गए, जिसमें सरकारी बलों ने हौथी हमलों का जवाब देने के लिए कुल 81 सैन्य अभियान चलाए। यमन सरकार के प्रवक्ता मजीद अल-नुजाइली ने इस बात की पुष्टि की कि यह सैन्य कार्रवाई सरकारी ठिकानों और आम नागरिकों की बुनियादी जगहों पर लगातार हो रहे हमलों को रोकने के लिए जरूरी थी।
अगस्त 2026 में हिंसक झड़पें और बढ़ी चिंताएं
पूरे अगस्त 2026 के महीने में यमन का संघर्ष काफी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हौथी मिलिशिया लगातार मारिब और हद्रमावत के सरकारी इलाकों के साथ-साथ पड़ोसी देश सऊदी अरब के ठिकानों पर भी मिसाइलें और ड्रोन दाग रही है। हालात तब और बिगड़ गए जब 20 अगस्त 2026 को हौथी लड़ाकों ने लाल सागर (Red Sea) की ओर 21 ड्रोन और मिसाइलें छोड़ीं। गनीमत यह रही कि अमेरिका और ब्रिटेन की नौसेना ने समय रहते इन सभी हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया और उन्हें मार गिराया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति प्रयासों को बड़ा खतरा
इस मची तबाही को देखकर दुनिया भर के बड़े अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र के लोग काफी चिंता में हैं। संयुक्त राष्ट्र के दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने अगस्त 2026 में चेतावनी देते हुए कहा कि साल 2022 में हुए समझौते के बाद से यमन एक बार फिर से पूर्ण रूप से बड़े युद्ध की कगार पर खड़ा है। इसके अलावा, यमन के लिए अमेरिकी विशेष दूत टिम लेंडरकिंग ने 21 अगस्त 2026 को बताया कि ईरान की तरफ से हौथी विद्रोहियों को मिलने वाला समर्थन काफी खतरनाक और घातक स्तर पर पहुंच चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गैस से समृद्ध मारिब क्षेत्र पर कब्जा करने की यह लड़ाई शांति के सभी प्रयासों को कमजोर कर रही है। इस इलाके में इस समय लगभग दो लाख बेघर लोग यानी आंतरिक रूप से विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर मारिब में यह खूनी संघर्ष ऐसे ही जारी रहा, तो इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में बड़ा संकट पैदा हो सकता है, जिसका असर वहां रहने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों पर भी सीधा पड़ेगा।