Yemen Conflict: मारिब में यमनी सेना ने हूती ठिकानों को किया तबाह, लगातार बढ़ते तनाव से बढ़ी चिंता.

यमन में हालात एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं और आम जनता की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। 12 अगस्त 2026 को यमन की सशस्त्र सेना ने मारिब गवर्नरेट के दक्षिणी मोर्चे पर बड़ी कार्रवाई करते हुए हूती लड़ाकों के कई ठिकानों और सभा स्थलों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। मध्य यमन में चल रहे संघर्ष में अचानक आई इस तेजी ने साल अप्रैल 2022 से चले आ रहे शांत माहौल को खतरे में डाल दिया है, जिससे देश में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने की आशंका जताई जा रही है।
हूती समूह के हमले और सेना का जवाब
यजीदी सेना की यह सैन्य कार्रवाई उसी दिन सुबह हूती समूह द्वारा किए गए भीषण मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में सामने आई। ईरान समर्थित हूती गुट के सैन्य प्रवक्ता यह्या सारी ने खुद इस बात की पुष्टि की कि उन्होंने मारिब और मोखा के तटीय शहर में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। हूती प्रवक्ता का दावा था कि उनके इन हमलों में सऊदी अरब से जुड़ी ताकतों के हथियार गोदाम, सैनिकों के ठिकाने और कमांड सेंटर तबाह हो गए, जिसमें कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की खबर है।
दूसरी तरफ, यमन की नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेस ने जानकारी दी कि 12 अगस्त को हूती विद्रोहियों ने पश्चिमी तट के पास के इलाकों पर कुल 10 रॉकेट और 4 ड्रोन दागे थे। हालांकि, यमनी वायु रक्षा इकाइयों ने समय रहते कार्रवाई करते हुए विस्फोटक से भरे एक मानव रहित विमान यानी ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। यमन के रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि यह सीधे तौर पर देश की सेना पर हमला है। मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया कि यमनी सशस्त्र सेना इन हमलों का बहुत जल्द और बहुत कड़ा जवाब देगी।
सीमावर्ती इलाकों में लगातार जारी है संघर्ष
इन बड़ी घटनाओं से ठीक पहले, 10 अगस्त 2026 को भी यमन के एक सैन्य सूत्र ने बताया था कि सरकारी बलों ने मारिब से सटे शबवा के हरिब इलाके में विद्रोहियों के ठिकानों पर जोरदार हमला बोला था। इसके अलावा 10 और 11 अगस्त को भी यमनी सशस्त्र बलों ने मारिब के अंदर हूती सेना और उनके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया था। सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का समर्थन करता है और जुलाई के अंत में मारिब में सैन्य मदद भी भेजी गई थी, लेकिन सऊदी अधिकारियों का कहना है कि यमन के अंदर उनका कोई सीधा जमीनी सैन्य दखल नहीं है।