यमन के प्रधानमंत्री शया मोहसेन अल-जिंदानी ने हूती विद्रोहियों द्वारा की जा रही आतंकी हरकतों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। 26 जुलाई 2026 को उन्होंने कहा कि हूती लगातार मिसाइल और ड्रोन के जरिए सऊदी अरब के तेल ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय शांति खतरे में है। यमन की सरकार ने इन हमलों को हताशा भरा कदम बताते हुए दुनिया के देशों से हूती विद्रोहियों को मिलने वाली फंडिंग और हथियारों की सप्लाई को पूरी तरह बंद करने की अपील की है।
सऊदी अरब का कड़ा रुख
सऊदी अरब ने हूती हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया है। जीजान और यनबू शहरों में हुए हमलों के बाद सऊदी सेना ने यमन के होदेइदाह प्रांत में मौजूद हूती सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। सऊदी अधिकारियों ने इसे अपने देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए एक जरूरी कदम बताया है। यमन की सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे यमन की जमीन का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं होने देंगे।
समुद्री सुरक्षा और यूएन का दखल
लाल सागर में तनाव बढ़ने से दुनिया भर का व्यापार प्रभावित हो रहा है। हूती विद्रोही सऊदी जहाजों को रोकने और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दे रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने रेजोल्यूशन 2739 और 2812 के तहत हूतियों को कमर्शियल जहाजों पर हमले तुरंत रोकने और Galaxy Leader जहाज व उसके चालक दल को रिहा करने का आदेश दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हूतियों पर हथियारों के ट्रांसफर को लेकर कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
