लाल सागर में भारतीय जहाज पर हूती हमला, यमनी प्रतिरोध ने ईरान को ठहराया जिम्मेदार

लाल सागर में एक बार फिर से सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। 4 अगस्त 2026 को यमन के तट के पास भारतीय मालवाहक जहाज MSV FAIZE NOORE OLIYA को एक विस्फोटक नाव द्वारा निशाना बनाया गया, जिससे जहाज समुद्र में डूब गया। इस घटना के बाद से यमनी नेशनल रेजिस्टेंस ने हूती समूहों की कड़ी आलोचना की है और उन्हें वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। प्रतिरोध समूह का आरोप है कि हूती विद्रोही ईरान के एक मोहरे के रूप में काम कर रहे हैं और उनके हमलों को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का सीधा समर्थन और मार्गदर्शन प्राप्त है।
घटना का विवरण और बचाव अभियान
इस खतरनाक हमले में भारतीय जहाज के सभी 13 भारतीय चालक दल के सदस्यों और एक अन्य व्यक्ति को समय रहते सुरक्षित बचा लिया गया। सभी प्रभावित लोगों को यमन के मुखा बंदरगाह (Mukha port) तक सुरक्षित पहुँचाया गया। भारत के विदेश मंत्रालय और यमनी सरकार ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। हूती सैन्य प्रवक्ता ने स्वयं 5 अगस्त 2026 को लाल सागर में एक जहाज को निशाना बनाने की जिम्मेदारी ली थी। यह हमला अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में हुआ था, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग पर बड़े खतरे के संकेत मिले हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराता खतरा
यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के सदस्य डॉ. अब्दुल्ला अल-अलीमी ने इस बात पर जोर दिया कि लाल सागर और बाब अल-मंदाब में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हमले एक खतरनाक स्थिति पैदा कर रहे हैं। यमन के सूचना मंत्री मुअम्मर अल-एरियानी ने भी चेतावनी दी है कि ईरान अपने छद्म समूहों का उपयोग करके अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट को खतरे में डाल रहा है। इन बढ़ते हमलों को देखते हुए सऊदी अरब ने 30 जुलाई 2026 को एक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन का नेतृत्व संभाला है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना है। समुद्री सुरक्षा के लिए तैनात यह गठबंधन अब इन समुद्री रास्तों पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुरक्षित बना रहे।