प्रोफेशनल नेटवर्किंग साइट linkedin अपनी प्राइवेसी नीतियों में बदलाव करने जा रहा है।  कंपनी की बेवसाइट पर शेयर किए अपडेट के अनुसार, 3 नवंबर 2025 से लागू होने वाले इन बदलावों के तहत माइक्रोसॉफ्ट को यूज़र डेटा का अधिक उपयोग करने की अनुमति मिलेगी। जिसे AI ट्रेनिंग और पर्सनलाइज़्ड विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

AI मॉडल्स को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाएगा डेटा का उपयोग

linkedin की ओर से पुष्टि की गई है कि कुछ यूज़र डेटा जैसे प्रोफ़ाइल, कार्य इतिहास, शिक्षा, पोस्ट और कमेंट्स का उपयोग “कंटेंट जनरेट करने वाले एआई मॉडल्स को ट्रेन” करने के लिए किया जाएगा। कंपनी ने कहा, “यह बदलाव यूज़र अनुभव को बेहतर बनाने और नए अवसरों से आसान कनेक्शन में मदद करेगा।”

प्राइवेट मैसेज का नहीं होगा उपयोग 

प्लेटफ़ॉर्म ने साफ किया कि प्राइवेट मैसेज का उपयोग नहीं किया जाएगा। यह एआई-ट्रेनिंग पॉलिसी केवल EU, EEA, यूके, स्विट्ज़रलैंड, कनाडा और हांगकांग के यूज़र्स पर लागू होगी। बाकी क्षेत्रों में कोई बदलाव नहीं होगा।

विज्ञापनों के लिए बढ़ेगा डेटा शेयरिंग

अपडेट के तहत linkedin अब अपने “अफ़िलिएट्स” (जिसमें माइक्रोसॉफ्ट और उसकी सहायक कंपनियां शामिल हैं) के साथ यूज़र डेटा को और व्यापक रूप से साझा करेगा, ताकि पर्सनलाइज़्ड और प्रासंगिक विज्ञापन दिखाए जा सकें। यह नीति अमेरिका और अधिकांश वैश्विक क्षेत्रों में लागू होगी, लेकिन EU, यूके और स्विट्ज़रलैंड में नहीं, जहां सख़्त प्राइवेसी क़ानून लागू हैं।
linkedin ने स्पष्ट किया कि “विज्ञापन उद्देश्यों के लिए वह केवल वही डेटा उपयोग करेगा, जिसकी अनुमति आपकी सेटिंग्स में दी गई हो।”

डेटा का उपयोग रोकने का तरीका

linkedin ने कहा कि यूज़र किसी भी समय यहां तक कि बदलाव लागू होने के बाद भी Opt-out कर सकते हैं।

  • एआई ट्रेनिंग से बाहर निकलने के लिए: Settings & Privacy → Data Privacy → How LinkedIn uses your data → Data for Generative AI improvement पर जाकर टॉगल ऑफ करें।

  • विज्ञापनों के लिए: Settings → Advertising Data में जाकर डिफ़ॉल्ट Opt-in विकल्प को डिसेबल करें।

उद्योग में बढ़ता रुझान

linkedin अकेला नहीं है। गूगल अपने Gemini मॉडल के लिए यूज़र डेटा का इस्तेमाल करता है, जबकि मेटा फेसबुक और इंस्टाग्राम की सामग्री से एआई को ट्रेन करता है।
linkedin के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन पहले ही कह चुके हैं कि एआई से नौकरियों पर असर पड़ने का डर “वाजिब” है।