रेलवे में 18,799 लोको पायलट की URGENT VACANCY. रेलवे की खुली आँख, ड्राइवर बनने का सपना है तुरंत कर लीजिए आवेदन

Lov Singh19 June 20242 min read0 viewsIndia

सोमवार को पश्चिम बंगाल में कंचनजंघा ट्रेन हादसे के अगले ही दिन रेलवे बोर्ड ने 18,799 सहायक लोको पायलट (ड्राइवरों) के भर्ती आदेश जारी किए हैं। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि ड्राइवर भर्ती प्रक्रिया को एक हफ्ते में पूरा किया जाए।

ओवर ड्यूटी कर रहे ड्राइवरों का बोझ कम होगा

रेलवे के इस फैसले से ओवर ड्यूटी कर रहे ड्राइवरों का बोझ कम होगा और मानवीय चूक (ड्राइवर) से होने वाले हादसों में कमी आएगी। रेलवे बोर्ड के निदेशक- स्थापना (रेलवे भर्ती बोर्ड) विद्याधर शर्मा ने उपरोक्त आदेश मंगलवार की देर शाम जारी किए हैं। इसकी कॉपी हिंदुस्तान के पास मौजूद है।

ट्रैक सर्किट और सिग्नल प्रणाली की विफलता

15 दिसंबर 2023 को 5696 सहायक लोको पॉयलेट (एएलपी) की ट्रैक सर्किट खराब होने से सिग्नल प्रणाली फेल हो गई थी। पश्चिम बंगाल ट्रेन हादसे का कारण वहाँ का खराब मौसम और बारिश थी। बारिश के चलते ट्रैक सर्किट में त्रुटि होने के कारण रानीपतरा-चत्तर हाट सेक्शन का ऑटोमैटिक सिग्नल सिस्टम खराब हो गया था और कंचनजंघा ट्रेन हादसे का शिकार हो गई।

ऑपरेटिंग विभाग की कार्यशैली पर सवाल

हादसे ने सिग्नल एंड टेलीकॉम सहित ऑपरेटिंग विभाग की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। जोनल रेलवे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि बारिश और तेज हवाओं के चलते सिग्नल सिस्टम फेल हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में ट्रेनों का परिचालन अब्सल्यूट (मैनुअल ट्रेन परिचालन) सिस्टम पर किया जाता है।

पदों पर भर्ती की मांग

पदों पर भर्ती करने की मंजूरी पहले दी जा चुकी है लेकिन 16 जोनल रेलवे से एएलपी की अतिरिक्त भर्ती की मांग की जा रही थी। रेलवे बोर्ड ने इसकी समीक्षा करने के बाद अब 18,799 एएलपी की भर्ती करने का फैसला लिया है।

रेसक्रूटमेंट प्रक्रिया की डेडलाइन

इसमें कहा गया है कि इंडियन रेलवे भर्ती प्रबंधन व्यवस्था (ओआईआरएमएस), रेलवे भर्ती बोर्ड, बंगलुरू की सहायता से एएलपी की भर्ती प्रक्रिया एक सप्ताह में पूरी करेगा। विदित हो कि रेलवे में लंबे समय से ड्राइवरों के पद रिक्त चल रहे हैं।

ड्राइवरों की ड्यूटी घंटे

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने ड्राइवरों की ट्रेन चलाने की ड्यूटी नौ घंटे निर्धारित की है। लेकिन कमी के चलते 31 फीसदी से अधिक ड्राइवरों को 10-12 घंटे तक ट्रेनें चलानी पड़ रही हैं। इसमें आठ फीसदी ड्राइवर 12 से 16 घंटे अधिक समय तक रेल चला रहे हैं।

 

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