Blog/समस्तीपुर रेलमंडल ने मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी डबल लाइन सर्वे शुरू; गंडक पर नया ब्रिज, लागत 60-80 करोड़
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समस्तीपुर रेलमंडल ने मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी डबल लाइन सर्वे शुरू; गंडक पर नया ब्रिज, लागत 60-80 करोड़

Sushma Kumari3 September 20252 min read0 views
What’s inside: मुजफ्फरपुर‑सीतामढ़ी रेलवे लाइन डबल करने का सर्वे शुरू हुआ है, इसमें गंडक पर नया बड़ा ब्रिज और भूमि चिह्नांकन शामिल है; परियोजना का खर्च और समयसीमा भी बताई गई है।

मुजफ्फरपुर‑सीतामढ़ी डबल रेलवे लाइन बनाने के लिए सर्वे की शुरुआत हो गई है। समस्तीपुर रेलमंडल के इंजीनियरिंग विभाग और सीतामढ़ी, रुन्नीसैदपुर, मुजफ्फरपुर इलाके के कर्मचारी मिलकर जमीन चिह्नित कर रहे हैं। इस लाइन में गंडक नदी पर एक बड़ा नया रेल ब्रिज भी बनना है।

सर्वे में खाता‑खेसरा देखकर रेलवे की जमीन और प्राइवेट जमीन अलग‑अलग की जा रही है ताकि अधिग्रहण का काम ठीक से हो सके। प्रस्ताव है कि गंडक पर नया ब्रिज मौजूदा ब्रिज से करीब 40 मीटर अलग बनाया जाएगा और मौजूदा स्टेशनों के बगल से दूसरी लाइन बिछेगी। साथ में तीन दर्जन से ज्यादा छोटे‑बड़े पुल‑पुलिया बनेंगे।

इस डबल लाइन का अनुमानित खर्च 60 से 80 करोड़ रुपए बताया गया है और इस वित्त वर्ष के अप्रैल बजट में इसका पैसा भी रखा गया है। सर्वे पूरा होने के बाद डीपीआर तैयार कर समस्तीपुर रेलमंडल के माध्यम से रेलवे बोर्ड को भेजा जाएगा। 2020 में भी पहले मंजूरी मिली थी और कुछ सेक्शन के लिए 130 करोड़ की स्वीकृति पहले दी गई थी।

डबल लाइन बनने से इस रूट पर ट्रेनें बढ़ेंगी और यह राम‑सीता सर्किट से भी जुड़ा है। इससे सीतामढ़ी, रीगा, सोनबरसा, बैरगनिया, भीट्ठामोड़, दरभंगा‑मधुबनी तक के यात्रियों के लिए देश के अन्य शहरों में पहुंच आसान होगी। परिचालन बढ़ने से यातायात क्षमता में भी वृद्धि होगी।

अगले कदम के रूप में सर्वे जल्द पूरा कर डीपीआर रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी और काम के लिए अगले चरण की योजना बनेंगी। कुल मिलाकर संबंधित सेक्शन समेत 255.5 किलोमीटर रेल दोहरीकरण का कार्य 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

Summary:
  • मुजफ्फरपुर‑सीतामढ़ी डबल लाइन के लिए सर्वे शुरू हुआ है।
  • गंडक पर नया बड़ा ब्रिज मौजूदा से करीब 40 मीटर दूर प्रस्तावित है।
  • परियोजना का खर्च 60‑80 करोड़ रुपये तय किया गया है और बजट में जगह मिली है।
  • लाइन राम‑सीता सर्किट से जुड़ी है और यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ेगी।
  • डीपीआर बनाकर रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी; कार्य 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य।
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