नोकिया-आसूस पेटेंट विवाद: जर्मनी में लैपटॉप बिक्री पर बैन, भारत में भी पहुंचा मामला
फिनलैंड की दूरसंचार कंपनी नोकिया और ताइवान की इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज आसुस के बीच चल रहा पेटेंट विवाद अब गहरा गया है. जर्मनी की एक अदालत ने नोकिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आसुस और एसर के लैपटॉप और डेस्कटॉप कंप्यूटर की बिक्री पर अस्थायी रोक लगा दी है. वहीं, भारत में भी नोकिया ने आसुस के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में मुकदमा दायर किया है, हालांकि यहां अभी तक किसी तरह की बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. खाड़ी देशों में इस विवाद का कोई खास असर फिलहाल देखने को नहीं मिला है.
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विवाद और अदालती फैसला क्या है?
यह पूरा विवाद नोकिया के हाई-एफिशिएंसी वीडियो कोडिंग (HEVC) पेटेंट के उल्लंघन का है. यह तकनीक वीडियो कंप्रेशन के लिए बहुत जरूरी है और इसका इस्तेमाल कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है. जर्मनी में म्यूनिख I क्षेत्रीय अदालत ने 22 जनवरी 2026 को नोकिया के पक्ष में फैसला सुनाया था.
इस फैसले के बाद, आसुस और एसर ने 16 फरवरी 2026 से जर्मनी में अपनी आधिकारिक वेबसाइटों से प्रभावित उत्पादों की बिक्री अस्थायी रूप से रोक दी है. अदालत ने पाया कि आसुस और एसर उचित, तर्कसंगत और गैर-भेदभावपूर्ण शर्तों (FRAND) पर लाइसेंसिंग समझौता करने में सहयोग नहीं कर रहे थे.
भारत और खाड़ी देशों पर क्या असर?
भारत में नोकिया ने जून 2025 में आसुस के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में दो वीडियो कोडिंग पेटेंट को लेकर मामला दर्ज कराया था. हालांकि, भारत में आसुस के किसी भी उत्पाद की बिक्री पर कोई रोक नहीं है. यहां लैपटॉप की बिक्री सामान्य रूप से जारी है. इंटरनेट पर जर्मनी की खबरों को भारत में प्रतिबंध के तौर पर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है.
खाड़ी देशों में इस पेटेंट विवाद से संबंधित किसी भी कानूनी कार्रवाई या बिक्री पर प्रतिबंध की कोई खबर नहीं है. इसलिए, खाड़ी देशों में रह रहे आम लोगों पर इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं है.
कंपनियों का क्या कहना है?
नोकिया का कहना है कि वह अपनी तकनीक के उपयोग के लिए उचित भुगतान चाहती है और बातचीत के लिए हमेशा तैयार है. कंपनी को उम्मीद है कि आसुस और एसर भी जल्द ही लाइसेंस समझौते के लिए तैयार होंगे.
आसूस ने एक बयान में कहा है कि वह बौद्धिक संपदा का सम्मान करती है. जर्मनी में अदालत के फैसले के बाद बिक्री अस्थायी रूप से रोक दी गई है और कंपनी निष्पक्ष समाधान के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई का मूल्यांकन कर रही है. एसर ने भी अदालत के फैसले का सम्मान करने और जर्मनी में प्रभावित उत्पादों की बिक्री अस्थायी रूप से निलंबित करने की बात कही है.




