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अमेरिका में ट्रंप की सख्ती से कामगारों का टोटा, अस्पतालों में डॉक्टर और रेस्तरां में स्टाफ का भारी संकट।

GulfHindi Desk by GulfHindi Desk
जनवरी 4, 2026
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अमेरिका में ट्रंप की सख्ती से कामगारों का टोटा, अस्पतालों में डॉक्टर और रेस्तरां में स्टाफ का भारी संकट।

GulfHindi Desk · जनवरी 1, 2026

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में ‘अमेरिका ग्रेट अगेन’ के नारे के साथ जिस ‘जीरो इमिग्रेशन’ पॉलिसी को सख्ती से लागू किया था, वह अब खुद अमेरिका के लिए ही बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। साल 2024 में अमेरिका में विदेश में जन्मी आबादी 14.8 फीसदी थी, जो 1890 के बाद सबसे अधिक थी, लेकिन ट्रंप के सत्ता संभालते ही प्रशासन ने बॉर्डर सील कर दिए और शरणार्थियों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी। हालात यह हैं कि नए लोगों के आने पर पाबंदी है और लंबे समय से वहां रह रहे लोगों को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

शहरों से लेकर गांवों तक तलाशी अभियान, दहशत के माहौल के बीच 20 से 30 लाख घटा सालाना आव्रजन

मौजूदा वक्त में अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) के एजेंट शहरों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक में आक्रामक तलाशी अभियान चला रहे हैं। इस सख्ती के चलते अमेरिका में कमाने-खाने गए विदेशी लोग दहशत में जी रहे हैं। इस कार्रवाई का सीधा असर यह हुआ है कि अमेरिका में सालाना शुद्ध आव्रजन (Net Immigration) 20 से 30 लाख घटकर महज 4.5 लाख रह गया है। बाइडन प्रशासन के तहत दी गई अस्थायी कानूनी राहत को रद्द करने से लाखों लोगों के सामने किसी भी समय निष्कासन का खतरा मंडरा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अब तक करीब छह लाख लोगों को देश से बाहर का रास्ता दिखा चुका है।


लाखों लोगों को देश से निकाला, लुइसियाना में बढ़ई और वेस्ट वर्जीनिया में नहीं मिल रहे डॉक्टर

इस पॉलिसी का सीधा असर अब अमेरिकी जमीन पर नजर आने लगा है। हालात यह हैं कि लुइसियाना की निर्माण कंपनियां बढ़ई ढूंढने के लिए संघर्ष कर रही हैं, तो वहीं टेनेसी के मेम्फिस में स्थानीय फुटबॉल लीग में पर्याप्त टीमें नहीं बन पा रही हैं क्योंकि अप्रवासी बच्चों ने आना बंद कर दिया है। अस्पतालों में डॉक्टर और नर्स नहीं मिल रहे हैं, जिसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। वीजा शुल्क बढ़ने और सख्ती के चलते स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में छात्रों की संख्या घट रही है। काम करने वाले लोग न मिलने के चलते रेस्तरां बंद होने के कगार पर हैं और खेतों में खड़ी फसलें भी खतरे में हैं।

चरमरा गई है स्वास्थ्य व्यवस्था: मशीनों से नहीं हो सकता इलाज, वीज़ा के डर से डॉक्टर नहीं आ रहे अमेरिका

ट्रंप की इस नीति से अमेरिका का हेल्थ सिस्टम सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है और चरमराने की कगार पर है। वेस्ट वर्जीनिया जैसे रिपब्लिकन राज्यों में ही नर्सिंग के 20 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। अमेरिका में हर तीन में से एक डॉक्टर विदेश में पढ़ा हुआ है, लेकिन अब वीजा नियमों के डर के कारण वे अमेरिका आने से इनकार कर रहे हैं। वैंडालिया हेल्थ नेटवर्क (Vandalia Health Network) के मुताबिक, सिर्फ एक साल के भीतर दो कार्डियोलॉजिस्ट देश छोड़कर चले गए क्योंकि उन्हें भरोसा नहीं था कि वे यहां स्थायी रूप से रह पाएंगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मशीनें इलाज नहीं कर सकतीं, उसके लिए इंसान चाहिए। ग्रामीण इलाकों में इमरजेंसी, डिलीवरी और बुजुर्गों की देखभाल के लिए स्टाफ का भारी टोटा पड़ गया है।

स्कूलों और कॉलेजों पर भी मार: फीस के अभाव में बिगड़ रहा बजट, रेस्तरां में बर्तन धोने वाले भी नहीं मिल रहे

ट्रंप प्रशासन के नियमों को लेकर बरती जा रही सख्ती का असर शिक्षा जगत पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लॉस एंजिलिस और न्यूयॉर्क में प्रवासी परिवार डर के मारे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं, जिससे स्कूलों में छात्रों की संख्या तेजी से घटी है और अब शिक्षकों की नौकरियों पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या घटने से कॉलेजों का बजट बिगड़ रहा है क्योंकि विदेशी छात्र पूरी फीस देते थे, जिससे अमेरिकी शिक्षा तंत्र को बड़ा सहारा मिलता था।

दूसरी ओर, रेस्तरां उद्योग भी मजदूरों की कमी से जूझ रहा है। रेस्तरां चेन ‘तजिकी’ के सीईओ डैन सिम्पसन ने बताया कि उन्हें कुक, डिशवॉशर और मैनेजर नहीं मिल रहे हैं, जिसके कारण दुकानें सीमित समय के लिए ही खुल पा रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि मजदूरों की कमी से लागत बढ़ रही है, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा।

विशेषज्ञों की चेतावनी: खुद को दुनिया से काट रहा है अमेरिका, चकनाचूर हो जाएगी ‘लैंड ऑफ ऑपर्चुनिटी’ वाली छवि

इस जमीनी हकीकत को लेकर अमेरिकी विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जिस तरह 1990 के दशक में या उससे पहले अमेरिका ने खुद को अलग-थलग कर लिया था, उसी तरह एक बार फिर अमेरिका खुद को दुनिया से काट रहा है। अर्थशास्त्री आगाह कर रहे हैं कि मौजूदा माहौल से देश में हर बीतते दिन के साथ मजदूरों की कमी हो रही है। इससे महंगाई बढ़ेगी, सेवाएं घटेंगी और दुनिया भर में अमेरिका की ‘लैंड ऑफ ऑपर्चुनिटी’ वाली छवि पूरी तरह चकनाचूर हो जाएगी।

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