राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में अपना घर बनाने का सपना देखने वाले हजारों लोगों के साथ धोखाधड़ी करने वाले एक प्रमुख बिल्डर समूह पर कानून का शिकंजा कस गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इस रियल एस्टेट ग्रुप की 585.46 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। यह पूरी कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के कड़े प्रावधानों के तहत की गई है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मच गया है।
गुरुग्राम, गाजियाबाद और मेरठ समेत एनसीआर के छह प्रमुख शहरों में फैले 340 से अधिक भूखंडों को जांच एजेंसी ने किया जब्त
इस बड़ी कार्रवाई का दायरा एनसीआर के कई प्रमुख शहरों तक फैला हुआ है। जांच एजेंसी ने जिन जगहों पर संपत्तियां कुर्क की हैं, उनमें गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, पलवल, मेरठ और बहादुरगढ़ शामिल हैं। अधिकारियों ने कुल मिलाकर 340 से अधिक भूखंडों (प्लॉट्स) को जब्त किया है। कुर्क की गई इन संपत्तियों में कई ऐसी जमीनें भी शामिल हैं जो विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं का हिस्सा थीं, लेकिन अब वे सरकारी कब्जे में आ गई हैं।
प्रोजेक्ट के नाम पर हजारों खरीदारों से करोड़ों रुपये वसूलने के बाद निर्माण कार्य अधुरा छोड़ने और फंड की हेराफेरी का गंभीर आरोप
बिल्डर समूह पर सबसे बड़ा आरोप यह है कि उसने लुभावने वादे करके हजारों घर खरीदारों से करोड़ों रुपये वसूले, लेकिन वादे के मुताबिक न तो उन्हें समय पर फ्लैट सौंपे और न ही परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया। जांच में यह बात भी सामने आई है कि खरीदारों से गाढ़ी कमाई का जो पैसा इकट्ठा किया गया था, उसका इस्तेमाल प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय कथित तौर पर अन्य जगहों पर डायवर्ट कर दिया गया और उसका गलत इस्तेमाल किया गया।
पिछले 12 से 19 वर्षों से अटकी हुई परियोजनाओं के कारण आर्थिक संकट और मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं हजारों निवेशक
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बिल्डर की कुछ परियोजनाएं 12 से 19 साल पहले लॉन्च की गई थीं। इतना लंबा वक्त बीत जाने के बावजूद न तो फ्लैट बनकर तैयार हुए और न ही प्लॉट पर कोई ठोस विकास कार्य हुआ। घर मिलने की आस में बैठे हजारों निवेशक और खरीदार आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और वे भारी आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
कुल 1075 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी के मामले में जांच का दायरा बढ़ा, आगे और भी संपत्तियों पर हो सकती है कुर्की की कार्रवाई
बिल्डर समूह और उसके निदेशकों के खिलाफ लगभग 4477 निवेशकों की शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। आरोपों के मुताबिक, निवेशकों से कुल 1075 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ली गई थी। जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई अभी रुकी नहीं है और जांच जारी है। यदि जांच के दौरान और भी छिपी हुई संपत्तियों का पता चलता है, तो अगले चरण में उन्हें भी कुर्क किया जाएगा। इस सख्त कार्रवाई से पीड़ित खरीदारों में अब यह उम्मीद जगी है कि जब्त संपत्तियों के जरिए भविष्य में उन्हें कुछ राहत या मुआवजा मिल सकता है।





