दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, अब FIR होने पर भी जब्त नहीं होगा पासपोर्ट, विदेश यात्रा को बताया मौलिक अधिकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि विदेश जाने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है जिसे आसानी से छीना नहीं जा सकता। Justice Purushaindra Kumar Kaurav की बेंच ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केवल पुलिस में FIR दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति का पासपोर्ट जब्त कर लिया जाए। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें एक व्यक्ति का पासपोर्ट केवल जांच के आधार पर जब्त किया गया था। यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो पुराने मुकदमों या पुलिस शिकायतों के कारण अपना पासपोर्ट रिन्यू नहीं करा पा रहे थे।
क्या FIR दर्ज होने पर पासपोर्ट रिन्यूअल रुक सकता है?
अदालत ने अपने फैसले में पासपोर्ट कानून की बारीकियों को बहुत आसान भाषा में समझाया है। कोर्ट ने कहा कि केवल एफआईआर (FIR) दर्ज होना इस बात का सबूत नहीं है कि आपराधिक कार्यवाही लंबित है। कानूनी तौर पर कार्यवाही तब ‘लंबित’ मानी जाती है जब मजिस्ट्रेट पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान (Cognizance) ले लेते हैं।
जब तक अदालत संज्ञान नहीं लेती, तब तक पासपोर्ट अधिकारी (Passport Authority) केवल इस आधार पर किसी का पासपोर्ट जब्त नहीं कर सकते कि उसके खिलाफ कोई जांच चल रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अधिकारी खुद को आपराधिक अदालतों से ऊपर नहीं मान सकते और मनमाने ढंग से यात्रा पर रोक नहीं लगा सकते।
विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए नियम में क्या स्पष्टता आई?
यह फैसला उन भारतीयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो काम या बिजनेस के लिए विदेश यात्रा करते हैं। अक्सर देखा गया है कि छोटे-मोटे विवादों में FIR होने पर पासपोर्ट ऑफिस फाइल रोक देता था। अब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख से यह साफ हो गया है कि प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को बाधा नहीं बनाया जा सकता।
- मौलिक अधिकार: विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है।
- NOC का महत्व: अगर ट्रायल कोर्ट से ‘No Objection Certificate’ (NOC) मिल जाता है, तो पासपोर्ट ऑफिस को सामान्य 10 साल के रिन्यूअल पर विचार करना चाहिए, न कि केवल 1 साल के लिए।
- सुप्रीम कोर्ट का रुख: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि किसी व्यक्ति को अनिश्चित काल के लिए विदेश जाने से रोकना सही नहीं है, खासकर जब अदालत ने उसे अनुमति दे दी हो।




