भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के करोड़ों ग्राहकों के लिए एक जरूरी अपडेट है। अगर आप मोबाइल बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पैसों का लेन-देन करते हैं, तो अब आपको अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने तत्काल भुगतान सेवा यानी आईएमपीएस (IMPS) के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के नियमों में बदलाव किया है। बैंक द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार, आईएमपीएस के संशोधित शुल्क आगामी 15 फरवरी से प्रभावी हो जाएंगे।
अब 25 हजार रुपये से अधिक राशि ट्रांसफर करने पर देना होगा अतिरिक्त शुल्क
अभी तक एसबीआई के ग्राहक आईएमपीएस सेवा का लाभ या तो मुफ्त में उठा रहे थे या फिर उन्हें इसके लिए बेहद मामूली शुल्क देना पड़ता था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब 25,000 रुपये से अधिक की राशि भेजने पर ग्राहकों को एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा। बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने और बढ़ती परिचालन लागत को देखते हुए किया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि 25,000 रुपये तक की छोटी रकम भेजने पर शुल्क में कोई खास बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे छोटे लेन-देन करने वाले ग्राहकों पर बोझ कम पड़ेगा।
1 लाख से 2 लाख रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर लगेगा फिक्स्ड चार्ज और जीएसटी
संशोधित नियमों के अनुसार, ट्रांजैक्शन की राशि बढ़ने के साथ ही शुल्क का स्लैब भी बढ़ता जाएगा। यदि कोई ग्राहक 25,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की राशि ट्रांसफर करता है, तो उसे एक तय अतिरिक्त शुल्क देना होगा। वहीं, अगर ट्रांसफर की जाने वाली रकम 1 लाख रुपये से 2 लाख रुपये के बीच है, तो यह शुल्क और अधिक हो जाएगा। बड़े लेन-देन के मामलों में बैंक फिक्स्ड चार्ज के साथ-साथ वस्तु एवं सेवा कर (GST) भी वसूल करेगा। इसलिए अब बड़ी रकम भेजते समय ग्राहकों को खाते से कटने वाले कुल पैसे का हिसाब पहले ही लगा लेना चाहिए।
तकनीकी ढांचे और रियल टाइम फंड ट्रांसफर की लागत के कारण लिया गया फैसला
शुल्क में इस बढ़ोतरी के पीछे बैंक ने तकनीकी कारणों का हवाला दिया है। आईएमपीएस एक रियल-टाइम फंड ट्रांसफर सिस्टम है, जिसके जरिए एक खाते से दूसरे खाते में तुरंत पैसा पहुंचता है। इस सिस्टम को सुचारू रूप से 24 घंटे चलाने, इसके तकनीकी रखरखाव और सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाए रखने के लिए बैंक को भारी खर्च उठाना पड़ता है। इसी लागत को मैनेज करने के उद्देश्य से बैंक ने शुल्कों में यह संशोधन किया है।
व्यापारियों और एक दिन में कई बार पैसे भेजने वाले ग्राहकों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
इस फैसले का सीधा असर उन ग्राहकों पर देखने को मिलेगा जो आईएमपीएस का इस्तेमाल बहुत बार करते हैं। विशेष रूप से वे व्यापारी या बिजनेस करने वाले लोग, जो अपने वेंडर्स को भुगतान करने के लिए दिन भर में कई बार बड़ी रकम ट्रांसफर करते हैं, उन्हें अब हर ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त पैसे खर्च करने होंगे। सामान्य बचत खाता धारकों की तुलना में कमर्शियल लेन-देन करने वालों के लिए यह बदलाव थोड़ा महंगा साबित हो सकता है।
अतिरिक्त चार्ज से बचने के लिए ग्राहक कर सकते हैं एनईएफटी और यूपीआई का इस्तेमाल
बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्राहक बढ़े हुए शुल्क से बचना चाहते हैं, तो उनके पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। ग्राहक पैसों के लेन-देन के लिए एनईएफटी (NEFT) का उपयोग कर सकते हैं, जो अब 24×7 उपलब्ध है और इस पर शुल्क न के बराबर या बहुत कम लगता है। इसके अलावा, छोटी रकम के लिए यूपीआई (UPI) सबसे बेहतरीन विकल्प है, क्योंकि इस पर फिलहाल कोई चार्ज नहीं है। बैंक ने भी ग्राहकों को सलाह दी है कि वे पैसे भेजने से पहले अपने खाते पर लागू होने वाले नए चार्ज स्लैब की जानकारी जरूर देख लें, ताकि बाद में किसी भी असुविधा से बचा जा सके।





