Saudi Arabia: पवित्र काबा को धोने की रस्म पूरी, सोने के दरवाज़े खोलकर ज़मज़म और गुलाब जल से होती है धुलाई
सऊदी अरब में पवित्र काबा को धोने की रस्म एक बेहद अहम और पुरानी परंपरा है। दो पवित्र मस्जिदों के कस्टोडियन किंग सलमान की ओर से क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) या मक्का के डिप्टी गवर्नर अक्सर इस रस्म को निभाते हैं। यह रस्म साल में दो बार पूरी की जाती है, जिसमें से एक मौका रमजान शुरू होने से ठीक पहले 15 शाबान के आसपास आता है। इस बार भी यह परंपरा पूरी धार्मिक मर्यादा के साथ निभाई गई है।
काबा को धोने के लिए तैयार होता है खास पानी
पवित्र काबा की सफाई के लिए किसी साधारण पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसके लिए एक विशेष मिश्रण तैयार होता है। इसमें ‘ज़मज़म’ के पानी को ताइफ के महंगे गुलाब जल, बेहतरीन ऊद (Oud) और कस्तूरी के साथ मिलाया जाता है।
इस खुशबूदार पानी में सफेद कपड़े को भिगोकर काबा की अंदरूनी दीवारों को पोंछा जाता है। फर्श को धोने के बाद खजूर के पत्तों और महीन सूती कपड़ों से सुखाया जाता है। प्रशासन इस दौरान सफाई और पवित्रता के सबसे ऊंचे मानकों का पालन करता है ताकि ढांचे को सुरक्षित रखा जा सके।
रस्म के दौरान क्या-क्या होता है?
यह रस्म पूरी तरह से निजी होती है और आम लोगों या तीर्थयात्रियों को उस वक्त अंदर जाने की इजाजत नहीं होती। रस्म शुरू करने से पहले और बाद में अधिकारी तवाफ करते हैं और काबा के अंदर दो रकात नमाज पढ़ते हैं।
इस दौरान ‘बानी शैबा’ परिवार के लोग, जो पीढ़ियों से काबा की चाबी की रखवाली कर रहे हैं, सोने का दरवाजा खोलते हैं। इस मौके पर सऊदी रॉयल फैमिली के सदस्य, हज और उमराह मंत्री और इस्लामिक देशों के राजदूत मौजूद रहते हैं।
काबा से जुड़ी कुछ खास बातें:
- समय: यह धुलाई साल में दो बार होती है, मुहर्रम और शाबान के महीने में।
- लागत: काबा धोने की रस्म के लिए कोई टिकट या कीमत नहीं होती, यह सरकारी धार्मिक कार्य है।
- किस्वा (गिलाफ): काबा का काला गिलाफ (किस्वा) हज के दौरान बदला जाता है, जिसकी कीमत लगभग 2 करोड़ रियाल (5.3 मिलियन डॉलर) होती है।
- इतिहास: यह परंपरा पैगंबर मुहम्मद (PBUH) के समय से चली आ रही है, जिन्होंने मक्का विजय के बाद काबा को धोया था।




