संसद में 29 जनवरी 2026 को पेश की गई आर्थिक समीक्षा (Economic Survey) में भारतीय मुद्रा को लेकर अहम जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 में भारतीय रुपये पर दबाव बना रहेगा और डॉलर के मुकाबले इसमें गिरावट जारी रहने की आशंका है। अभी रुपया 91.80 से 92.00 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो अब तक का काफी निचला स्तर माना जा रहा है।
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क्यों गिर रहा है रुपये का भाव?
सर्वे में बताया गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बावजूद रुपया अपनी क्षमता से कम (Undervalued) प्रदर्शन कर रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण विदेशी निवेश में कमी आना है। जनवरी 2026 में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार से लगभग 4 बिलियन डॉलर की निकासी की है, जिससे रुपये पर बोझ बढ़ा है। इसके अलावा वैश्विक अस्थिरता और व्यापार घाटा (Trade Deficit) भी रुपये की कमजोरी की बड़ी वजहें हैं।
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के मुख्य आंकड़े
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश की आर्थिक स्थिति का ब्यौरा नीचे दी गई टेबल में समझा जा सकता है:
| विवरण | आंकड़ा / स्थिति |
|---|---|
| GDP विकास दर अनुमान (FY26) | 7.4% |
| राजकोषीय घाटा लक्ष्य (Fiscal Deficit) | 4.4% |
| RBI रेपो रेट (जनवरी 2026) | 5.25% |
| रुपये का ऐतिहासिक निचला स्तर | 92.29 |
आम आदमी और बाजार पर क्या होगा असर?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कमजोर रुपया फिलहाल भारतीय निर्यातकों (Exporters) के लिए एक ढाल का काम कर रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों के बीच कमजोर करेंसी से भारतीय सामान विदेशी बाजार में प्रतिस्पर्धी बना रहता है। हालांकि, लंबी अवधि में स्थिरता लाने के लिए सरकार अब संरचनात्मक सुधारों और ‘स्वदेशी’ रणनीति पर जोर दे रही है। RBI ने भी स्थिति को संभालने के लिए ब्याज दरों को 3 साल के निचले स्तर 5.25% पर कर दिया है।




