PM मोदी की फिलिस्तीनी विदेश मंत्री से मुलाकात: भारत ने गाजा शांति प्लान का किया स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिलिस्तीन की विदेश मंत्री वार्सेन अघाबेकियन से एक महत्वपूर्ण मुलाकात की है। इस बैठक के दौरान पीएम मोदी ने एक बार फिर फिलिस्तीन के लोगों के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया। दोनों नेताओं के बीच हुई इस चर्चा में मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत फिलिस्तीन के नागरिकों के कल्याण और उनके अधिकारों के साथ खड़ा है।
फिलिस्तीन के लोगों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और विकासात्मक सहयोग को प्रधानमंत्री मोदी ने फिर से दोहराया
इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने फिलिस्तीन के साथ भारत के ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने विदेश मंत्री अघाबेकियन को आश्वस्त किया कि भारत फिलिस्तीन के लोगों के लिए अपनी मानवीय सहायता और विकासात्मक समर्थन जारी रखेगा। भारत हमेशा से फिलिस्तीन में शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण (Capacity Building) में सहयोग करता रहा है। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि मुश्किल समय में भारत अपने मित्र राष्ट्रों का साथ नहीं छोड़ता और फिलिस्तीन के लोगों की खुशहाली भारत की प्राथमिकता में शामिल है।
गाजा शांति योजना और क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए चल रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का भारत ने किया स्वागत
बातचीत का एक प्रमुख हिस्सा गाजा में चल रहे संघर्ष और वहां शांति बहाली के प्रयासों पर केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से ‘गाजा शांति योजना’ (Gaza Peace Plan) का जिक्र करते हुए इसका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हिंसा को समाप्त करने और स्थायी शांति लाने के लिए जो भी प्रयास किए जा रहे हैं, भारत उनका समर्थन करता है। पीएम मोदी ने इस बात को रेखांकित किया कि संघर्ष का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है, ताकि क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
विदेश मंत्री वार्सेन अघाबेकियन के साथ हुई इस बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों और शांति की उम्मीदों को दी नई दिशा
फिलिस्तीन की विदेश मंत्री और पीएम मोदी के बीच हुई यह बैठक कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। इस मुलाकात ने न केवल दोनों देशों के बीच विश्वास को और गहरा किया है, बल्कि वैश्विक मंच पर शांति के पक्षधर के रूप में भारत की भूमिका को भी स्पष्ट किया है। बैठक के अंत में इस बात पर सहमति बनी कि शांति प्रयासों को निरंतर बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि सामान्य नागरिकों को राहत मिल सके और क्षेत्र में अमन-चैन का माहौल बन सके।