संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और क्षेत्र के अन्य छह प्रमुख देशों ने गाजा में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई को लेकर एक साझा और गंभीर चेतावनी जारी की है। इन देशों का स्पष्ट मानना है कि इजरायल के मौजूदा कदम न केवल मानवीय संकट को बढ़ा रहे हैं, बल्कि क्षेत्र में शांति बहाली की किसी भी संभावना को पूरी तरह से नष्ट कर रहे हैं। इन राष्ट्रों ने जोर देकर कहा है कि मौजूदा हालात में किसी भी तरह की कूटनीतिक पहल का सफल होना असंभव होता जा रहा है।

गाजा में लगातार हो रहे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन और सैन्य कार्रवाई से शांति योजना के प्रयासों पर लग रहा है गहरा आघात

आठ देशों के इस समूह ने अपने कड़े रुख का इजहार करते हुए कहा है कि गाजा पट्टी में जिस तरह से लगातार हमले किए जा रहे हैं, वह भविष्य के किसी भी ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (दो-राष्ट्र समाधान) के लिए सीधा खतरा है। राजनयिक प्रयासों को धक्का लग रहा है और जिस तरह से रिहायशी इलाकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है, उससे बातचीत के रास्ते बंद होते जा रहे हैं। इन देशों का कहना है कि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि पहले जमीन पर हो रहे उल्लंघनों को तुरंत रोका जाए।

क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने मौजूदा हालात, वैश्विक शक्तियों से तत्काल और प्रभावी हस्तक्षेप की मांग उठी

इन खाड़ी और अरब देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया है कि अगर गाजा में इजरायली उल्लंघन नहीं रुके, तो इसकी आग पूरे मध्य पूर्व में फैल सकती है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी। वैश्विक शक्तियों से अपील की गई है कि वे केवल बयानों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर हिंसा रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। यह समय मूकदर्शक बने रहने का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन सुनिश्चित कराने का है ताकि एक बड़े युद्ध को टाला जा सके।

आम नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता

इस समूह द्वारा जारी चेतावनी में आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया गया है। यह साफ किया गया है कि मानवीय सहायता को रोकना या बाधित करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। शांति की पहली शर्त यही है कि गाजा के लोगों को तत्काल राहत मिले और इजरायली सेना की ओर से हो रहे उल्लंघनों पर पूर्ण विराम लगे। इन देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकारों का हनन जारी रहेगा, तब तक किसी भी व्यापक शांति योजना पर काम करना बेमानी होगा।

GulfHindi Desk

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