बिहार के इंजीनियरों को खाड़ी में नौकरी-वीज़ा पर संकट, मान्यता न होने से बढ़ी परेशानी
बिहार के इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के सभी 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों को राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NBA) से मान्यता नहीं मिली है। इस कारण छात्रों को विदेश में मास्टर्स की पढ़ाई करने और सऊदी अरब व कुवैत जैसे खाड़ी देशों में नौकरी पाने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अब इन देशों ने शैक्षिक योग्यता के सत्यापन को अनिवार्य कर दिया है, जिससे बिना NBA मान्यता प्राप्त डिग्री वालों को वीज़ा मिलने में दिक्कत आ रही है।
बिहार के कॉलेजों को क्यों नहीं मिली मान्यता?
फरवरी 10, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, बिहार के किसी भी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के पास NBA की सक्रिय मान्यता नहीं है। पहले मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के सिविल इंजीनियरिंग प्रोग्राम के पास मान्यता थी, लेकिन वह भी हाल ही में खत्म हो गई है। कॉलेजों को मान्यता न मिलने के पीछे कुछ मुख्य वजहें हैं:
- प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर जैसे पदों पर शिक्षकों की कमी है।
- आधुनिक प्रयोगशाला उपकरणों का अभाव देखा गया है।
- “परिणाम-आधारित शिक्षा” (Outcome-Based Education – OBE) के रिकॉर्ड सही ढंग से मौजूद नहीं हैं।
खाड़ी देशों में नौकरी और वीज़ा पर सीधा असर
भारत NBA के माध्यम से वाशिंगटन समझौते का हिस्सा है, जिससे NBA मान्यता प्राप्त “टियर-1” कार्यक्रमों की इंजीनियरिंग डिग्रियों को 20 से अधिक सदस्य देशों में मान्यता मिलती है। हालांकि, बिहार के गैर-मान्यता प्राप्त कॉलेजों से पढ़े छात्रों को अब अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में मास्टर्स (MS/M.Tech) के लिए आवेदन में दिक्कत आ रही है। खाड़ी देशों के नियम और कड़े हो गए हैं:
- सऊदी अरब (जनवरी 14, 2025 से): भारतीय नागरिकों के लिए नौकरी वीज़ा पाने से पहले पेशेवर और शैक्षिक योग्यताओं का सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। बिना सत्यापित या गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों की डिग्रियों को अस्वीकार किया जा रहा है।
- कुवैत (KSE): कुवैत सोसाइटी ऑफ इंजीनियर्स (KSE) को निवास (इक़ामा) नवीनीकरण और वर्क परमिट के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की जरूरत होती है। KSE केवल NBA-मान्यता प्राप्त डिग्रियों को ही NOC के लिए मान्यता देता है। बिहार के राज्य इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़े छात्रों को अक्सर NOC नहीं मिलती, जिससे वे वीज़ा के लिए अयोग्य हो जाते हैं।
समस्या को सुलझाने के लिए क्या हो रहा है?
फरवरी 2, 2026 को पटना के डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साइंस सिटी में एक उच्च स्तरीय राज्य-स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें NBA के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल डी. सहस्रबुद्धे और बिहार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक अहमद महमूद शामिल हुए।
इस कार्यशाला में सभी 38 कॉलेजों को तुरंत “सेल्फ-असेसमेंट रिपोर्ट” (SAR) तैयार करने और छात्रों के करियर की संभावनाओं को बचाने के लिए फैकल्टी-छात्र अनुपात को ठीक करके प्राथमिकता के आधार पर मान्यता के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया गया है।




