अजित पवार विमान हादसे पर रोहित पवार का बड़ा दावा, 10 लाख बचाने के लिए जबरदस्ती कराई लैंडिंग
विधायक रोहित पवार ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि खराब मौसम और कम दृश्यता के बावजूद पायलट पर बारामती में ही विमान उतारने का दबाव बनाया गया था। रोहित पवार का कहना है कि अगर विमान पुणे या किसी और जगह डाइवर्ट होता तो पहले से बुक किया गया लगभग 10 लाख रुपये का किराया बेकार हो जाता। इस हादसे में अजित पवार समेत 5 लोगों की जान चली गई थी।
दृश्यता और नियमों को लेकर क्या है विवाद?
रोहित पवार ने बताया कि लैंडिंग के वक्त वहां दृश्यता (Visibility) केवल 3 किलोमीटर थी, जबकि DGCA के नियमों के मुताबिक सुरक्षित लैंडिंग के लिए यह कम से कम 5 किलोमीटर होनी चाहिए। बारामती हवाई पट्टी पर एटीसी टावर नहीं है और वहां इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) की सुविधा भी मौजूद नहीं है। ऐसे में विजुअल फ्लाइट रूल्स (VFR) का पालन करना जरूरी होता है, लेकिन यहां नियमों की अनदेखी की बात कही जा रही है।
मुख्यमंत्री फडणवीस और जांच एजेंसियों का अपडेट
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 11 फरवरी को पुष्टि की है कि विमान का ब्लैक बॉक्स मिल गया है और डेटा की जांच चल रही है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि रोहित पवार द्वारा उठाए गए संदेहों को स्पष्ट किया जाएगा। DGCA ने इस हादसे के बाद सभी चार्टर विमान ऑपरेटरों की सुरक्षा जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, महाराष्ट्र CID ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।
- ट्रांसपोंडर: रोहित पवार का दावा है कि क्रैश से एक मिनट पहले विमान का ट्रांसपोंडर जानबूझकर बंद किया गया था।
- अंतरराष्ट्रीय जांच: उन्होंने अमेरिका (NTSB) या फ्रांस (BEA) जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग की है।
- पुराने रिकॉर्ड: आरोप है कि विमान संचालक कंपनी VSR Ventures के सुरक्षा मानकों पर यूरोपीय एजेंसी ने पहले ही सवाल उठाए थे।




