Kuwait News: एक आदमी के 18 बच्चों के नाम पर बड़ा धोखा, अब 226 लोगों की नागरिकता पर लटकी तलवार
कुवैत में नागरिकता को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। यहाँ एक ही परिवार की फाइल की जांच के दौरान बहुत बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। एक कुवैती नागरिक ने अपनी फाइल में 6 पत्नियां और 18 बच्चे दर्ज करवा रखे थे। जब अधिकारियों ने इसकी गहराई से जांच की, तो पता चला कि यह सब कुछ एक सोची-समझी साजिश थी। इस धोखाधड़ी के पकड़े जाने के बाद अब 200 से ज्यादा लोगों की नागरिकता खतरे में पड़ गई है।
जांच में क्या मिला और कैसे हुआ खुलासा?
कुवैत के नैशनलिटी इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट ने जब इस केस की फाइल खोली, तो उन्हें कई गड़बड़ियां मिलीं। जिस व्यक्ति की फाइल जांची जा रही थी, उसने रिकॉर्ड में दिखाया था कि उसकी 6 पत्नियां हैं। जांच में शक है कि इनमें से एक पत्नी की पहचान पूरी तरह से नकली थी। इसके अलावा, फाइल में कुल 18 बच्चों के नाम दर्ज थे।
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इन 18 में से 4 बच्चे पूरी तरह से फर्जी तरीके से जोड़े गए थे। यानी उनका उस व्यक्ति से कोई असल रिश्ता नहीं था। बात यहीं खत्म नहीं होती, इन 4 फर्जी लोगों के आगे चलकर अपने परिवार बढ़ गए, जिनमें बच्चे और पोते-पोतियां शामिल हैं। इस तरह कुल मिलाकर 226 लोग ऐसे हैं, जो इस फर्जीवाड़े के कारण कुवैती नागरिकता का लाभ ले रहे थे।
फिलहाल दो और नामों की जांच बहुत बारीकी से चल रही है। अगर ये दोनों भी फर्जी साबित हुए, तो फर्जी बच्चों की संख्या 6 हो जाएगी और प्रभावित होने वाले लोगों की गिनती और ज्यादा बढ़ जाएगी।
DNA और Google Maps ने कैसे खोली पोल?
इस जटिल मामले को सुलझाने के लिए कुवैती पुलिस और जांच एजेंसियों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। सिर्फ कागजों पर भरोसा करने के बजाय, उन्होंने वैज्ञानिक सबूत जुटाए।
- DNA टेस्ट: यह जांच का सबसे अहम हिस्सा साबित हुआ। जेनेटिक टेस्ट से साफ हो गया कि कुछ लोग जो खुद को परिवार का हिस्सा बता रहे थे, उनका उस परिवार से खून का कोई रिश्ता नहीं था। एक व्यक्ति जो भाई बनकर रह रहा था, वह भी पकड़ में आ गया।
- Google Maps: एक आरोपी जो काफी समय से फरार था, उसे गूगल मैप्स की मदद से ट्रैक किया गया। मैप पर उसका ‘कुवैती दीवान’ (बैठक) उसके असली नाम से लिस्टेड था, जो उसकी कुवैती पहचान से बिल्कुल अलग था।
- सोशल मीडिया: जांच अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर पुरानी पोस्ट खंगालीं। शादियों और अन्य कार्यक्रमों की बधाई देने वाले संदेशों में लोगों ने आरोपियों के असली गल्फ नाम (असली पहचान) का इस्तेमाल किया था, जो पुलिस के लिए बड़ा सबूत बन गया।
सरकार का कड़ा रुख और नियम
इस पूरे मामले की निगरानी खुद प्रथम उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री Sheikh Fahd Al-Yousef कर रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि नागरिकता एक ‘रेड लाइन’ है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, उसे छोड़ा नहीं जाएगा।
सरकार ने ‘Continuous Pursuit’ यानी लगातार पीछा करने की नीति अपनाई है। जो लोग जांच से बचने के लिए देश छोड़कर भाग गए हैं, उन पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। नियम अब सख्त हैं—आरोपियों को वापस आकर DNA टेस्ट देना होगा। अगर वे जांच में शामिल नहीं होते हैं, तो उनकी नागरिकता तुरंत रद्द कर दी जाएगी। यह अभियान पूरे देश में चल रहा है ताकि अवैध रूप से लाभ ले रहे लोगों को सिस्टम से बाहर किया जा सके।




