सिर्फ़ Galgotias ही नहीं बल्कि Wipro ने भी गाल गोदा, लालच और शोबाजी ने कराया All India बेइज्जती.
तो यह मान लेना चाहिए कि जो अधिकारी निरीक्षण के लिए तैनात थे उन्होंने अपना काम अच्छे से नहीं किया या फिर उनका टैलेंट सच में इस क़दर नहीं था कि वह चाँदनी चौक से ख़रीदे हुए सामान और चीन के बाज़ार से ख़रीदे हुए सामान में अंतर बता सके। ये वैज्ञानिक प्रोटोटाइप तो सही बात है उनके सिलेबस से कोसो दूर की बात रही होगी लेकिन अगर प्रधानमंत्री के इतने बड़े सपने के ज़िम्मेदारी अगर उन्होंने अपने कंधे लिए थे तो किसी बढ़िया टेक्निकल कंपनियां एजेंसी को ही चुन लेते, जो इसकी स्क्रूटनी कर लेती वह पूरे दुनिया भर में हुई इस थू थू की भारी क़ीमत से काफ़ी सस्ती पड़ती।
अगर आप उस जगह पर नहीं गए हैं तो यह भी समझ लीजिए कि यह पूरा इवेंट एक तरीक़े से PR इवेंट के तौर पर रह गया, जहाँ देश दुनिया से बुलाये गए अनदेखे चेहरे के साथ फोटोबाजी होती रही और उसके लिए महंगे स्टाल खरीदे लोग अंदर बाहर किए जाते रहे. भीड़ बढ़ाने और काउंटिंग में नंबर दिखाने के लिए प्रवेश निःसुल्क तो रखा गया एक बात हैं लेकिन बिना किसी स्क्रूटिनी या बेसलाइन के आम लोगो को यहाँ का एंट्री दिया गया ताकि संख्या अखबारों में लाखो में गिनाया जा सके. कंपनी स्टाल लगाए लोग 1 सही ऑडियंस से बात करने के लिए 25 बिना काम के लोगो को मुंह दिखा के मुस्कुराते रहे ताकि डेकोरम बना रहे.
कुछ समय में ही सोशल मीडिया पर इस इवेंट के वैल्यू ऑफरिंग पर सवाल जरूर कंपनी मालिको के तरफ़ से ज़रूर देखने को मिलने लगेगा. विदेशी मेहमान जो लाखो तक पहुँच चुके होटल की किराए (जो की हमे लगे की ये माइलस्टोन था लेकिन ये हमारे लालचीपन का आईना भी हैं) में रहकर यहाँ आकर ऐसा ठगा हुआ महसूस किए हैं तो उसका प्रतिक्रिया आपको जरूर ही देखने को मिलेगी और बहुत जल्द दिखेगा भी.
मैं भी पहुचने से पहले काफ़ी खुश था कि आवेदन के बाद प्रॉपर बिहार पुलिस के तरफ़ से वेरिफिकेशन के बाद मुझे जाने के लिए पटना से कन्फर्म किया गया, पहले बिहार पुलिस हेड क्वार्टर फिर लोकल थाना दानापुर ने सारी जानकारी लेकर संतुष्टि जताई तब मैं फ्लाइट का टिकट लिया और इस उम्मीद में गया की सब अच्छे लोगो की जमात होगी अतः 6 दिन बेहद प्रोडक्टिव और अवसरों भरे होंगे, लेकिन वहाँ जाने के बाद पता चला कि मैं तो गांधी मैदान में होने वाले दहशरा के कार्यक्रम जैसे इवेंट में पहुँच गया हूँ जहाँ कोई भी किधर से भी और कैसे भी बस पहुँच रहा हैं और आगे क्की कहानी अब व्यापी हो ही चुकी हैं।
सरकार का पहल सराहनीय था लेकिन इसको मूर्त रूप देने वाले अफसर सच में कैपेबल नहीं थे अन्यथा जो आज हुआ वो नहीं होता, IIT और बड़े संस्थानों में होने वाले टेक इवेंट ज़्यादा वैल्यू अपने यहाँ आने वाले विजिटर के लिए ऐड कर पाते हैं।
अगर बढ़िया Event हो पाता तो Sarvam.ai, Recapi AI जैसे स्टाल जो सच में भारत की कहानी थे उन्हें जरूर वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान मिलती क्यूंकि वो वही थे जिस थीम के लिए ये इवेंट थे. एकदम ठोस और नए भारत की नई तस्वीर जो विदेशी बड़े मेहमानों के बड़े मॉडल से अपने तकनीक से टक्कर ले रहे थे. लेकिन जो हुआ वो नीचे हैं आराम से पढ़िये रिपोर्ट लंबी हैं लेकिन पक्की हैं।
Dubai के बाद अब भारत बना AI का बड़ा सेंटर, Sarvam AI के फीचर्स ने Google और OpenAI को छोड़ा पीछे

17 फरवरी 2026 की बात है, India AI Impact Summit — दुनिया का पहला Global AI Summit जो Global South में हो रहा है, वो भी भारत में, PM मोदी की अध्यक्षता में, 110 से ज़्यादा देश, 20 Heads of State, Sundar Pichai, Sam Altman, Dario Amodei — सब शामिल। मंच भव्य था, दुनिया की निगाहें टिकी थीं।
Greater Noida की Galgotias University ने अपना stall सजाया। Star attraction था — एक चार पैरों वाला Robot Dog, जिसे नाम दिया गया था ‘ORION’ यानी Operational Robotic Intelligence Node। DD News के reporter आए, camera घुमा, और Professor Neha Singh — जो School of Management में Communications पढ़ाती हैं — ने कहा:
“You need to meet Orion. This has been developed by the Centre of Excellence at Galgotias University.” — Prof. Neha Singh, DD News पर
1. Video वायरल हुई। लेकिन इसके बाद जो हुआ वो असली तमाशा था।
सोशल मीडिया यूज़र्स ने Robot को पहचान लिया। यह कोई Galgotias innovation नहीं था — यह था Unitree Go2, जिसे चीनी कंपनी Unitree Robotics बनाती है। यह Robot ऑनलाइन लगभग ₹2-3 लाख में मिलता है। Amazon पर, AliExpress पर। दुनियाभर की Universities इसे research और education के लिए खरीदती हैं।
जो University ₹350 करोड़ के AI इकोसिस्टम का दावा कर रही थी, जो PM मोदी के ‘Viksit Bharat’ के सपने को आगे ले जाने का दम भर रही थी — उसका ‘star innovation’ बाज़ार में ₹2 लाख में मिलने वाला चीनी Robot था।
2. Galgotias का बचाव — और उसकी परतें
जैसे ही backlash बढ़ा, University ने X पर statement जारी किया। कहा — ‘हमने कभी दावा नहीं किया कि हमने यह Robot बनाया। यह तो students के लिए सीखने का ज़रिया है, classroom in motion है।’
लेकिन X पर Community Note ने इस statement को तुरंत fact-check किया और लिखा — यह दावा गलत और भ्रामक है। Video में साफ था कि University representative ने Robot को ‘Galgotias का product’ बताया था।
इसके बाद Prof. Neha Singh ने कहा — ‘Your six can be my nine’ — यानी मेरा 6 तुम्हारा 9 हो सकता है। एक international summit में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली faculty member का यह जवाब था।
“By one misinterpretation, the internet has gone by storm. It might be that I could not convey well what I wanted to say, or it was misunderstood. I am a faculty member in communications at the School of Management, not in AI.” — Prof. Neha Singh
और फिर University ने माफी माँगी — कहा कि professor ‘ill-informed’ थीं, उन्हें media से बात करने का अधिकार नहीं था। एक तरफ से robot को ‘Galgotias innovation’ बताया, दूसरी तरफ कहा कि ‘हमने ऐसा कभी नहीं कहा’।
3. असली सवाल — जो कोई नहीं पूछ रहा
मीडिया, विपक्ष, सोशल मीडिया — सब Galgotias पर टूट पड़े। ठीक भी है। लेकिन एक बेहद ज़रूरी सवाल दब गया:
- Galgotias को यह Stall मिली कैसे? किसने Select किया? किसने Approve किया? और क्या कोई Verification हुई?
India AI Impact Summit कोई Local Science Fair नहीं था। यह MeitY — Ministry of Electronics & Information Technology — की flagship event थी। आयोजन में STPI (Software Technology Parks of India) custodian था। IndiaAI Mission इसे run कर रहा था। PM मोदी ने उद्घाटन किया। 300+ exhibitors, 30+ देश।
क्या इतने बड़े आयोजन में exhibitors को बिना किसी screening के stall दे दिया जाता है? क्या कोई यह देखने वाला नहीं था कि कौन क्या दिखाने जा रहा है? क्या MeitY या STPI ने कोई due diligence की थी?
एक छोटे से Techfest या Science Exhibition में भी project selection committee होती है। Mentor होते हैं। Teachers projects को review करते हैं। अगर कोई student किसी दूसरे का project लेकर आए तो उसे entry नहीं मिलती। लेकिन India के सबसे बड़े AI Summit में — जहाँ PM खुद inauguration करें — वहाँ बिना किसी verification के ₹2 लाख का चीनी Robot ₹350 करोड़ की ‘innovation’ बनकर stage पर चढ़ गया?
सवाल यह नहीं है कि Galgotias ने गलती की। सवाल यह है कि वह गलती इतने बड़े मंच तक पहुँची कैसे? Gate-keeping कहाँ थी?
4. Wipro — वही Robot, दूसरा नाम, कोई हंगामा नहीं
यह controversy और भी बड़ी हो जाती है जब पता चलता है कि Galgotias अकेला नहीं था।
NDTV पर एक वीडियो आई — Wipro के stall से। Wipro के Head of Innovation Varun Dubey एक Robot Dog को present कर रहे थे — नाम था ‘TJ’। Robot की capabilities बताई गईं। यह भी वही Unitree Go2 था। Unitree और Go2 की branding body से हटाई गई थी, लेकिन ‘O2’ marking अभी भी robot के head पर दिखती थी।
Wipro ने सफाई दी — ‘हम software company हैं, hardware company नहीं। हमने कभी नहीं कहा कि हमने यह बनाया।’ लेकिन presentation का tone ऐसा था जो innovation का impression देता था।
एक ही Robot — दो नाम: पहले ‘ORION’ (Galgotias), फिर ‘TJ’ (Wipro)। दोनों उसी Unitree Go2 का rebranding। Newslaundry ने इसे ‘From Orion to TJ: How Indian media rebranded a Chinese robodog as innovation’ शीर्षक से cover किया।
Galgotias को बाहर किया गया। Wipro के बारे में कोई action नहीं। यह दोहरा मानदंड क्यों? एक Private University — निशाना। एक Corporate Giant — माफ।
5. DD News और Media की विफलता
इस पूरे प्रकरण में एक और बड़ा किरदार है — DD News और वह reporter जिसने ‘Orion’ का video shoot किया।
Reporter ने एक Robot के बारे में University representative का दावा सुना — ‘यह Galgotias ने बनाया’ — और बिना एक भी सवाल पूछे, बिना online check किए, camera roll कर दिया। Reporter ने Robot को ‘cute और naughty’ बताया। यह भी कहा कि ‘Galgotias जैसी Universities Viksit Bharat का सपना पूरा करेंगी।’
एक basic Google search से पता चल जाता कि Unitree Go2 commercially available है। एक journalist का काम होता है verify करना। लेकिन DD News — जो taxpayers के पैसे से चलता है — वहाँ यह basic fact-checking नहीं हुई।
PTI ने भी एक Press Release run की जिसमें Galgotias के stall को ‘Key Attraction’ बताया और ORION को ‘crowd puller’ कहा — बिना किसी verification के।
6. Accountability की माँग — जिम्मेदारी कहाँ-कहाँ है?
इस पूरी घटना में accountability सिर्फ Galgotias की नहीं है। एक chain of responsibility है जिसे देखना ज़रूरी है:
क) MeitY और STPI — Exhibitor Selection Process
Expo में 300+ exhibitors को invite किया गया। क्या सबकी projects verify हुईं? क्या कोई committee थी जो देखती कि कौन क्या दिखा रहा है? IT Secretary S. Krishnan ने बाद में कहा — ‘हम नहीं चाहते कि exhibitors ऐसी चीज़ें दिखाएं जो उनकी अपनी नहीं हैं।’ लेकिन यह नियम पहले से क्यों नहीं था? यह warning event के बाद क्यों आई?
ख) DD News और Mainstream Media
सरकारी broadcaster ने बिना fact-check किए एक झूठे दावे को national television पर broadcast किया। PTI ने promotional content को news की तरह run किया। यह journalism नहीं, PR था।
ग) Galgotias University प्रबंधन
एक School of Management की Communications faculty को AI Robot के बारे में media से बात करने भेजा गया — जो खुद AI नहीं पढ़ातीं। यह decision University management का था। जो professor वहाँ गई वो ill-informed थी — लेकिन उसे वहाँ भेजने का फैसला किसने किया?
घ) Wipro और Corporate Accountability
एक ₹3 लाख करोड़ से ज़्यादा की कंपनी, जिसके पास हज़ारों engineers हैं — उसे भी वही चीनी Robot लेकर आना पड़ा? और उसे कोई action नहीं?
7. Science Fair vs. World Summit — यह तुलना क्यों ज़रूरी है
जब कोई student किसी school Science Fair में project लेकर जाता है, तो उसे पहले class teacher को दिखाना होता है। फिर एक internal selection होती है। फिर district level, फिर state level। हर stage पर scrutiny होती है।
लेकिन India के सबसे बड़े global AI event में — जहाँ दुनिया के 110 देश, 20 world leaders, और top tech CEOs आए हों — वहाँ एक University बिना किसी verification के ₹2 लाख का चीनी Robot ‘अपनी innovation’ बताकर stage पर रख सकती है?
यह सिर्फ Galgotias की गलती नहीं है। यह उस system की गलती है जिसने एक school science fair से भी कम scrutiny के साथ exhibitors को global stage पर जाने दिया।
एक Techfest में project reject हो जाता है अगर वो original नहीं है। लेकिन India AI Summit 2026 में चीनी Robot का नाम बदलकर stage पर लाना हो गया — बिना किसी रोकटोक के।
8. RJD की माँग और राजनीतिक आयाम
RJD ने Galgotias के खिलाफ राजदोह के मामले दर्ज करने की माँग की। Party ने X पर लिखा — ‘AI Summit में भारत को global embarrassment दिलाने वालों के खिलाफ treason cases होने चाहिए।’
RJD ने यह भी कहा कि University owner, जिस महिला ने interview दिया, जिस journalist ने fake interview conduct किया, और जिस IT Minister ने permission दी — इन सबकी जाँच होनी चाहिए।
Congress ने भी निशाना साधा — कहा कि ‘Modi government ने AI को लेकर India की global हँसाई करवाई।’
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अलग बात है। लेकिन इसमें एक ज़रूरी बिंदु है — अगर permission और selection process में कहीं भी accountability तय होती, तो यह घटना होती ही नहीं।
9. असली AI vs. दिखावे का AI — एक बड़ी समस्या
यह घटना एक बड़ी और गहरी समस्या का लक्षण है। India में AI को लेकर जो उत्साह है — वह कभी-कभी असलियत से दूर हो जाता है।
Galgotias ने ₹350 करोड़ के AI इकोसिस्टम का दावा किया। NVIDIA supercomputing का ज़िक्र किया। Centre of Excellence बनाया। लेकिन जब दुनिया के सामने ‘innovation’ दिखाने का वक्त आया — तो ₹2 लाख का चीनी Robot था।
यह सवाल सिर्फ Galgotias से नहीं है। पूरे देश में कितनी universities हैं जो ‘AI courses’ चला रही हैं — लेकिन न faculty है, न infrastructure, न research? कितने ‘AI startups’ हैं जो असल में Excel sheet पर काम करते हैं और AI का label लगाकर funding लेते हैं?
जब दिखावा innovation की जगह ले लेता है, तो नतीजा यही होता है — ₹2 लाख का Robot, ₹350 करोड़ का दावा, और दुनियाभर में बेइज्जती।
10. आगे क्या होना चाहिए — ठोस सुझाव
1. Mandatory Pre-Summit Verification:
किसी भी government-hosted expo में exhibitors के projects की independent technical verification होनी चाहिए। एक expert committee जो यह confirm करे कि जो दिखाया जा रहा है वो actually उस institution का है।
2. MeitY और STPI की जवाबदेही:
यह जाँच होनी चाहिए कि Galgotias को stall कैसे मिली, किसने approve किया, और क्या कोई screening process थी। यह report public होनी चाहिए।
3. DD News की Accountability:
एक सरकारी broadcaster ने बिना fact-check किए गलत जानकारी broadcast की। इस पर internal review होनी चाहिए।
4. समान नियम — सबके लिए:
Galgotias को बाहर किया गया। लेकिन Wipro के बारे में क्या? अगर नियम है कि अपनी चीज़ ही दिखाओ — तो वह सबके लिए समान होना चाहिए, चाहे Private University हो या Corporate Giant।
5. AI Education में Quality Control:
‘AI Course’ चलाने के लिए minimum standards होने चाहिए। UGC और AICTE को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि AI programs में असली content हो, न सिर्फ नाम।
एक देश के रूप में हमें यह सबक लेना होगा
Galgotias University ने गलती की — यह निर्विवाद है। एक professor ने जो नहीं पढ़ाती वो topic लेकर camera के सामने झूठे दावे किए। University ने एक चीनी Robot को अपनी ‘innovation’ के रूप में present किया। यह शर्मनाक था।
लेकिन अगर हम सिर्फ Galgotias को कोसते रहे और बड़े सवाल नहीं पूछे — तो हम असली समस्या से आँखें चुरा रहे हैं।
India AI Impact Summit — जो Global South का पहला और सबसे बड़ा AI event था — वहाँ selection process इतनी कमज़ोर थी कि एक ₹2 लाख का Robot ₹350 करोड़ की ‘innovation’ बनकर stage पर आ गया। Media ने verify नहीं किया। MeitY ने screening नहीं की। और जब पकड़ा गया — तो सारा गुस्सा University पर निकला, system पर नहीं।
भारत का AI future तभी उज्जवल होगा जब हम दिखावे से ऊपर उठें। असली research करें। असली innovation करें। और जब accountability की बात आए — तो सिर्फ सबसे कमज़ोर कड़ी को न तोड़ें, पूरी chain को देखें।
“Viksit Bharat का सपना तभी पूरा होगा जब हमारे innovations असली हों — सिर्फ उनके नाम नहीं।”
स्रोत: DDNEWS, PTI, ANI, Bloomberg, Al Jazeera, The Tribune, Newslaundry, Business Standard, OpIndia, The Federal | तिथि: 18-19 फरवरी 2026





