अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में तैनात की सबसे बड़ी सेना, 2003 के बाद ऐसा मंजर पहली बार
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत को अचानक बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। 2003 में हुए इराक युद्ध के बाद यह अमेरिका की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती है। इस बेड़े में दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर, युद्धपोत और सैकड़ों अत्याधुनिक फाइटर जेट्स शामिल हैं। यह हलचल ऐसे समय में हो रही है जब ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर है।
आसमान और समंदर में अमेरिका का जमावड़ा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी ताकत दोगुनी कर दी है। 20 फरवरी 2026 तक की जानकारी के अनुसार, वहां 120 से ज्यादा एयरक्राफ्ट तैनात हो चुके हैं। इसमें दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत USS Gerald R. Ford भी शामिल हो रहा है। यह तैनाती इतनी विशाल है कि पिछले 24 घंटों में ही 50 से ज्यादा नए फाइटर जेट्स वहां पहुंचे हैं।
- USS Abraham Lincoln: यह स्ट्राइक ग्रुप अरब सागर में पहले से मौजूद है और निगरानी कर रहा है।
- USS Gerald R. Ford: यह विशाल कैरियर अपने 3 विध्वंसक जहाजों और 5000 सैनिकों के साथ कैरेबियन से आ रहा है।
- लड़ाकू विमान: F-35 स्टील्थ, F-22 और F-16 जैसे घातक विमान भेजे गए हैं।
- सैनिक उड़ानें: सेना के साजो-सामान के लिए 150 से ज्यादा कार्गो फ्लाइट्स का इस्तेमाल हुआ है।
ईरान को दी गई चेतावनी और आम लोगों पर असर
इस भारी तैनाती के पीछे मुख्य कारण ईरान के साथ चल रहा तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ चेतावनी दी है कि ईरान के पास परमाणु और मिसाइल समझौते के लिए मुश्किल से 10 से 15 दिन का वक्त है। उन्होंने कहा है कि अगर बात नहीं मानी गई तो परिणाम बुरे हो सकते हैं।
कतर के अल उदीद और जॉर्डन के एयरबेस पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों और उड़ानों पर पड़ सकता है। फिलहाल अमेरिका के कुल 14 युद्धपोत और भारी वायुसेना क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर चुके हैं।




