ईरान में फंसे भारतीयों के लिए नई एडवाइजरी, समुद्री रास्ते बंद होने पर सरकार का बड़ा फैसला
भारत सरकार के Directorate General of Shipping (DGS) ने मिडिल ईस्ट में अचानक बढ़ते तनाव को देखते हुए एक बेहद अहम सर्कुलर जारी किया है। 1 मार्च 2026 को आई इस अपडेट के मुताबिक, ईरानी समुद्री सीमा (Iranian waters) और उसके आसपास मौजूद भारतीय नाविकों को अब चौबीस घंटे सतर्क रहने की जरूरत है। सरकार ने साफ कहा है कि हालात गंभीर हैं और सुरक्षा नियमों का पालन करना हर हाल में जरूरी है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
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सरकार ने नाविकों और शिपिंग कंपनियों को क्या निर्देश दिए?
DGS ने शिपिंग कंपनियों और भर्ती एजेंसियों (RPSL) पर सख्त पाबंदी लगा दी है। अगले आदेश तक किसी भी भारतीय नाविक (Seafarer) को नौकरी के लिए ईरान नहीं भेजा जाएगा। जो भारतीय नाविक पहले से वहां मौजूद हैं, उन्हें तुरंत कमर्शियल फ्लाइट्स या अन्य उपलब्ध साधनों से देश छोड़ने की सलाह दी गई है। यह फैसला नाविकों की जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
- ईरान के लिए नाविकों की नई भर्ती और भेजने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
- मौजूदा नाविकों को जल्द से जल्द वहां से निकलने की सख्त सलाह दी गई है।
- जहाजों पर ‘सुसाइड ड्रोन’ और बोट हमलों से बचने के लिए सुरक्षा ड्रिल (Drills) करना अब जरूरी है।
- भारतीय नेवी और DGComm Centre को हर दिन अपनी लोकेशन और स्थिति की रिपोर्ट भेजना अनिवार्य है।
हवाई सफर और तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?
Strait of Hormuz में रास्तों के ब्लॉक होने की खबरों के बीच तेल की कीमतों में तुरंत उछाल देखा गया है। बाजार में डर है कि अगर तेल के टैंकर रोके गए तो कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका असर पेट्रोल-डीजल के दाम पर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि समुद्री जहाजों का इंश्योरेंस प्रीमियम अब काफी महंगा हो जाएगा, जिससे माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ेगा।
इसका सीधा असर हवाई यात्रा पर भी दिखना शुरू हो गया है। दिल्ली एयरपोर्ट पर 100 से ज्यादा और मुंबई एयरपोर्ट पर 125 उड़ानें या तो कैंसिल हो गई हैं या उनका रास्ता बदला गया है। मिडिल ईस्ट के कई देशों ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है, जिससे बचे हुए रूट्स पर टिकटों के दाम बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।




