Iran US Conflict Update: अमेरिका और इजरायल ने ईरान के 2000 ठिकानों पर किया हमला, मिडिल ईस्ट में उड़ानों पर पड़ा असर
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में अब तक 2,000 ठिकानों को निशाना बनाया गया है। Operation Epic Fury नाम का यह मिशन 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था और 4 मार्च तक इसने एक बड़ा आंकड़ा पार कर लिया है। इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिकी और इजरायली सेनाएं मिलकर काम कर रही हैं। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए सुरक्षा और हवाई यात्रा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि कई देशों ने अपने एयरस्पेस में सुरक्षा बढ़ा दी है।
किन ठिकानों को बनाया गया निशाना और क्या हुआ नुकसान?
अमेरिकी सेना ने ईरान के उन बुनियादी ढांचों को तबाह किया है जो हमले करने की क्षमता रखते थे। इसमें मिसाइल दागने वाले ठिकाने, ड्रोन लॉन्च करने वाली जगहें और नौसेना के जहाज शामिल हैं। खबरों के अनुसार ईरान के सर्वोच्च नेता और लगभग 49 वरिष्ठ अधिकारी शुरुआती हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं। जवाबी कार्रवाई में कुवैत में 6 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है। नीचे दी गई टेबल में ऑपरेशन से जुड़े मुख्य डेटा को देखा जा सकता है।
| मुख्य विवरण | आधिकारिक जानकारी |
|---|---|
| निशाना बनाए गए कुल ठिकाने | 2,000 लक्ष्य |
| प्रमुख हथियार | B-2 स्टील्थ बॉम्बर और टॉमहॉक मिसाइल |
| अमेरिकी नुकसान | 6 सैनिक शहीद, 18 घायल |
| ईरानी नुकसान | खामेनेई और 49 वरिष्ठ नेताओं की मौत की रिपोर्ट |
| समुद्री नुकसान | 9 ईरानी युद्धपोत डूबे |
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और प्रवासियों पर असर
इस संघर्ष की वजह से मिडिल ईस्ट के हवाई रास्तों में भारी बदलाव हुआ है जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देरी हो रही है। सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों में सुरक्षा को हाई अलर्ट पर रखा गया है क्योंकि ईरान की ओर से जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले रिहायशी इलाकों और एयरपोर्ट्स के पास दर्ज किए गए हैं। बहरीन, यूएई और इराक में स्थित दूतावासों ने अपने गैर-जरूरी कर्मचारियों को वहां से निकालना शुरू कर दिया है।
- सऊदी अरब और यूएई ने अपने नागरिकों और प्रवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
- हवाई रास्तों में बदलाव के कारण टिकट की कीमतें और यात्रा का समय बढ़ सकता है।
- ईंधन की कीमतों में उछाल आने से खाड़ी देशों में दैनिक खर्चों पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।
- सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं करने देगा।




